देश वासियों के उम्मीद पर पानी फेर गए मोदी जी !

देश वासियों के उम्मीद पर पानी फेर गए मोदी जी !
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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद जनता की नज़र आज प्रधानमंत्री के भाषण पर टिकी हुई थी साल के आखिरी दिन प्रधानमंत्री ने जो बातें रखी वो जुली रही देश वासियों को प्रधानमंत्री के भाषण से काफी उम्मीदें थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी… अल्लामा इक़बाल के शेर को उधृत करते हुए कहा कि इसे देशवासियों ने जी कर दिखाया। पीएम मोदी का पूरा भाषण नोटबंदी से परेशान लोगों को ‘रिश्‍वत’ देने का प्रयास दिखाई देता है। जिसमें छोटा-मोटा फायदा दिखाकर नोटबंदी के दर्द को भुला देने की बात की गई। उनके भाषण में कहीं नहीं कहा गया कि नोटबंदी को 50 दिन हो चुके हैं और नकदी की कमी को कैसे दूर किया जाएगा। जबकि नोटबंदी के एलान के कुछ दिन बाद ही उन्‍होंने कहा था कि 50 दिन के अंदर हालात दुरुस्‍त हो जाएंगे। लेकिन हालात सुधरे तो हैं लेकिन पर्याप्‍त नहीं हैं। अगर इस संबोधन में वे नोटबंदी के बाद जनता की दिक्‍कतों को दूर करने की बात करते तो लोगों का नया साल और बेहतर होता। जनता आज बड़े उम्मीद से प्रधानमंत्री मोदी के भाषण सुन रही थी उन्हें उम्मीद थी की उन्हें कुछ रहत के रूप में मोदी 15 लाख न सही 15 हज़ार देने का वादा कर सकते हैं लेकिन प्रधानमंत्री मोदी हमेशा की तरह एक और सपना बेच कर निकल गये। आठ नवंबर को नोटबंदी का ऐलान करने वाली भाजपा सरकार और सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री मोदी को पिछले पचास दिनों में जनता को हुई परेशानी और तकलीफ का अंदाज़ा कितना यह आप प्रधानमंत्री को पिछली रैलियों में रोते हुए देख अंदाज़ा कर रहे होंगे. सरकार और संगठन दोनों को जमीनी स्तर की पूरी जानकारी है वे समझ गये हैं की जनता नोटबंदी से किस कदर परेशान और हताश है। लगभग सौ मोतें और न जानने कितनी घटना मीडिया की सुर्खियाँ बनी। अब इसकी भरपाई के लिए मोदी सरकार जनता के सामने एक लोलीपो जैसा स्कीम ले कर आई है जिसमें नोटबन्दी से नाराज जनता को तरह तरह की सहूलियत दे कर रिझाने की कोशिश भर समझा जा रहा है. दरअसल यह पूरी कवायद केंद्र की भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश में हाल में होने जा रहे चुनाव को ध्यान में रख कर की है यह बात जनता से नेता तक को समझ आरही है।

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