दोनो हाथ नहीं है तो क्या हुआ मेरे सीने में क़ुरआन मजीद मौजूद है

दोनो हाथ नहीं है तो क्या हुआ मेरे सीने में क़ुरआन मजीद मौजूद है
किसी इंसान में अज़म और हौसला हो इरादे बुलंद और मंज़िल को पाने की ख़ाहिश उस के दिल में बस जाए शौक़ जुनून की हद तक पहुंच जाए तो अल्लाह ताला उस के लिए कामयाबी और कामरानी की राहें खोल ही देता है। अल्लाह ताला का ये निज़ाम है कि अगर कोई इंसान ब

किसी इंसान में अज़म और हौसला हो इरादे बुलंद और मंज़िल को पाने की ख़ाहिश उस के दिल में बस जाए शौक़ जुनून की हद तक पहुंच जाए तो अल्लाह ताला उस के लिए कामयाबी और कामरानी की राहें खोल ही देता है। अल्लाह ताला का ये निज़ाम है कि अगर कोई इंसान बसारत से महरूम हो जाए तो उस की दिमाग़ी सलाहियतें उसी क़दर बढ़ा देता है

कि वो बीनाई वालों से भी आगे निकल जाता है इसी तरह क़ुव्वत समाअत से महरूम लोग बेहतरीन समाअत रखने वालों से कहीं ज़्यादा सुनने से ज़्यादा अमल करने वाले बन जाते हैं। जब कि दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो हाथों और पैरों से महरूमी के बावजूद ज़िंदगी के हर शोबा में सेहतमंद हाथों और पैरों के हामिल अफ़राद से बाज़ी ले जाते हैं।

ग़रज़ हर चीज़ में अल्लाह ताला की मसलेहत पोशीदा होती है। लेकिन ये हक़ीक़त है कि अल्लाह जिस बंदे पर रहम और करम करना चाहे उसे इल्म की दौलत से मालामाल कर देता है।

क़ारईन! आज हम एक ऐसे लड़के से आप को वाक़िफ़ करवाते हैं जो दोनों हाथों से महरूम है लेकिन उस के बुलंद अज़ाइम, हिमालयाई इरादे और सब से बढ़ कर इल्मे दीन हासिल करने की जुस्तजू और शौक़ को देख कर हर कोई रश्क करने लगता है।

इस कमसिन लड़के का अपनी माज़ूरी के बारे में कहना है मेरे हाथ ना हुए तो क्या हुआ मेरे सीने में क़ुरआन मजीद है हम बात कर रहे हैं साबिर नगर मुराद नगर के रहने वाले 15 साला मुहम्मद इमरान की जिस ने हाल ही में क़ुरआन मजीद हिफ़्ज़ कर लिया है। बचपन से ही ये लड़का बड़ी आज़माईशों से गुज़रता रहा।

एक इसी उम्र में जब दूसरे लड़के अपने वालिद के गोद में बैठे अपनी मासूम हरकतों से उन की ख़ुशीयों में इज़ाफ़ा करते मुहम्मद इमरान के वालिद मुहम्मद बाबर का साया सर से उठ गया। यानी बचपन में ही वो वालिद के साया से महरूम हो गए।

दो बहनों के इस इकलौते भाई की ज़िंदगी का चिराग़ उस वक़्त बुझते बुझते रह गया जब उस की उम्र सिर्फ़ 5 साल थी। उसके मदर्रसा के बानी और नाज़िम हाफ़िज़ मुहम्मद अंज़ारुल हक़ के मुताबिक़ उन्हों ने जब ये मदर्रसा शुरू किया था उस वक़्त मुहम्मद इमरान के बाशमोल सिर्फ़ दो तलबा ने इस में दाख़िला लिया था और अब इस मदर्रसा में तलबा की तादाद 160 तक जा पहुंची है।

उन्हों ने ये भी बताया कि मुहम्मद इमरान ने 4 साल में हिफ़्ज़ क़ुरआन किया है और वो इस मदर्रसा से हिफ़्ज़ करने वाले पहले तालिबे इल्म हैं इतवार को मुनाक़िदा जल्से दस्तारबंदी में डॉक्टर मुहम्मद इदरीस अंसारी, जनाब शजीआ अंसारी, हज़रत मौलाना मुफ़्ती तजम्मुल हुसैन क़ासिमी, हज़रत मौलाना प्रोफेसर राशिद नसीम नदवी, हज़रत मौलाना मुफ़्ती आरिफ़ बिल्लाह क़ासिमी साहिब की मौजूदगी में उस लड़के की दस्तार बंदी की जाएगी।
हाफ़िज़ मुहम्मद अंज़ारुल हक़ के मुताबिक़ मुहम्मद इमरान के हुस्ने अख़्लाक़ से हर कोई मुतास्सिर हो जाता है। दूसरे लड़के उन से दोस्ती के ख़ाहां रहते हैं। मुहम्मद इमरान ने बताया कि घर वाले बिलख़ुसूस माँ उन की मदद के लिए हर लम्हा तैयार रहती हैं।

अगर्चे वो सुबह 9 बजे से सहपहर साढे़ तीन बजे तक मदर्रसा में रहते हैं। बाद के औक़ात में खेल कूद में भी हिस्सा लेते हैं। वो क्रिकेट बहुत अच्छा खेलते हैं बहरहाल मुहम्मद इमरान अज़म और हौसला की एक बेहतरीन मिसाल और उन लोगों के लिए एक सबक़ है जो हाथ रखने के बावजूद भी मेहनत से जी चुराते हैं। हुसूले इल्म से दूरी इख़्तियार करते हैं।

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