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दोबारा हिंदू मज़हब कुबूल करने वालों को…..

हिन्दू मज़हब में वापसी करने वाले को अगर उसकी असल ज़ात के लोग स्कुबूल कर लें तो उसे उस ज़ात का माना जाना चाहिए. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है.

हिन्दू मज़हब में वापसी करने वाले को अगर उसकी असल ज़ात के लोग स्कुबूल कर लें तो उसे उस ज़ात का माना जाना चाहिए. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है.

यह मामला ईसाई से हिन्दू बने एक शख्स को Scheduled caste का फायदा दिए जाने से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि हिन्दू मज़हब में वापसी करने वाला कोई शख्स अगर पुख्ता तौर पर ये साबित कर सके कि दूसरा मज़हब अपनाने से पहले वो या उसके अजदाद किस ज़ात के थे साथ ही उसकी असल ज़ात के लोग उसे अपनाने को तैयार हों तो उसे उसकी असल ज़ात का ही माना जाना चाहिए.

जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस वी.गोपाल गौड़ा की बेंच ने जिस मामले में ये फैसला सुनाया है वो केरल के एक ऐसे शख्स का है जो ईसाई से हिन्दू बना है. के पी मनु नाम का ये शख्स पैदाइशी ईसाई था क्योंकि उसके दादा ने ईसाई मज़हब अपनाया था. लेकिन 24 साल की उम्र में वो हिन्दू बन गया.

हिन्दू बनने के बाद उसके दादा की ज़ात ‘पुलाया’ ने उसे अपना लिया. इस ज़ात का Scheduled caste होने की वजह से मनु को ज़ात की बुनियाद पर नौकरी मिली. लेकिन केरल हाई कोर्ट ने इसे गैर कानूनी करार देते हुए उसे नौकरी से बर्खास्त करने और 15 लाख का जुरमाना वसूलने का फैसला सुनाया.

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की दोबारा हिन्दू बनने वाले के.पी. मनु को Scheduled caste के ज़ात का सनद दिया जाना कानूनन सही था. इसलिए उसे नौकरी पर बहाल किया जाये.

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