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दोस्ती पर भाजपा का रुख नरम लेकिन शिवसेना …..

महाराष्ट्र विधानसभा इंतेखाबात में सबसे बड़ी पार्टी की शक्ल में उभरने के बाद भाजपा ने शिवसेना के साथ दोस्ती बहाली के मुद्दे पर नरम रुख दिखाया है| इसके बावजूद इलेक्शन के दौरान भाजपा पर तीखे हमले करने वाली शिवसेना की झिझक कायम है|

महाराष्ट्र विधानसभा इंतेखाबात में सबसे बड़ी पार्टी की शक्ल में उभरने के बाद भाजपा ने शिवसेना के साथ दोस्ती बहाली के मुद्दे पर नरम रुख दिखाया है| इसके बावजूद इलेक्शन के दौरान भाजपा पर तीखे हमले करने वाली शिवसेना की झिझक कायम है|

भाजपा महाराष्ट्र में मुकम्मल अक्सरियत मिलने या हंग असेम्बली के हालात शिवसेना के साथ हुकूमत बनाने का आप्शन खुले रखती दिख रही है| भाजपा के कौमी तरजुमान शाहनवाज हुसैन ने पिछले दिनो कहा कि भाजपा की ओर से शिवसेना के लिए दरवाजे बंद नहीं हुए हैं|

महाराष्ट्र भाजपा के सदर देवेंद्रफणनवीस ने भी शिवसेना को भाजपा का कुदरती दोस्त बताया है| भाजपा के मरहूम लीडर गोपीनाथ मुंडे की बेटी और नौजवान लीडर पंकजा मुंडे भी मानती हैं कि इंतेखाबी कड़वाहट वोटिंग के साथ ही खत्म हो चुकी है| भाजपा लीडरों के ये बयान इशारे देते हैं कि भाजपा दोनों हालात में शिवसेना को साथ रखना चाहती है| चाहे उसे मुकम्मल अक्सरियत हासिल हो या या त्रिशंकु विधानसभा (Hung assembly) के हालात बने|

भाजपा के इस रुख पर नरमी तो शिवसेना भी दिखा रही है, लेकिन इलेक्शन के दौरान उद्धव ठाकरे समेत पार्टी के दिगर लीडरों की तरफ से किए गए हमले शिवसेना को दुबारा भाजपा के नजदीक आने से रोक रहे हैं. शिवसेना के तरजुमान संजय राऊत ने भाजपा लीडरों के जज़्बातों का एहतेराम करने की बात करते हुए दोहराया है कि अक्सरियत शिवसेना को ही मिलेगी और उद्धव ठाकरे आइंदा वज़ीर ए आला होंगे. ज़राये के मुताबिक शिवसेना भाजपा की तजवीज को खुलकर कुबूल ने में इसलिए झिझक रही है क्योंकि एक तो वह रियासत में छोटे भाई के किरदार में रहना नहीं चाहती. दूसरे, भाजपा के साथ हुकूमत बनाने पर रियासत की मुखालिफ पार्टी उस पर इक्तेदार का लालची होने का इल्ज़ाम लगाना शुरू कर देंगे.

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