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दो आई ए एस ओहदेदारों के दरमियान महकमा अक़लीयती बहबूद तात्तुल का शिकार

महकमा अक़लीयती बहबूद के सेक्रेट्री आख़िर कौन हैं? ये सवाल महकमा के ओहदेदारों और मुलाज़मीन के लिए एक मुअम्मा बन चुका है क्योंकि जिस ओहदेदार को वो सेक्रेट्री तसव्वुर कर रहे हैं वो फाईलों पर दस्तख़त करने तैयार नहीं।

महकमा अक़लीयती बहबूद के सेक्रेट्री आख़िर कौन हैं? ये सवाल महकमा के ओहदेदारों और मुलाज़मीन के लिए एक मुअम्मा बन चुका है क्योंकि जिस ओहदेदार को वो सेक्रेट्री तसव्वुर कर रहे हैं वो फाईलों पर दस्तख़त करने तैयार नहीं।

इस तरह दो आई ए एस ओहदेदारों के दरमयान महकमा अक़लीयती बहबूद तात्तुल का शिकार है। यूं तो महकमा अक़लीयती बहबूद पर हुकूमत की अदमे तवज्जो के बारे में कुछ कहने की ज़रूरत नहीं लेकिन गुज़िश्ता दो दिन से महकमा को अजीबो ग़रीब सूरते हाल का सामना है।

गुज़िश्ता दो दिनों से अक़लीयती बहबूद के लिए कोई सेक्रेट्री नहीं है और हुकूमत की तकनीकी कोताही के सबब कोई भी ओहदेदार अक़लीयती बहबूद से मुताल्लिक़ फाईलों पर दस्तख़त करने तैयार नहीं। इस सूरते हाल के सबब अक़लीयती बहबूद के इदारों से मुताल्लिक़ फाईलें यक्सूई से महरूम हैं और कई अहम फ़ैसलों के सिलसिले में ओहदेदारों को दुशवारीयों का सामना है।

जनाब अहमद नदीम (आई ए एस ) कमिशनर एक्साईज़ और प्रोहिबिशन जिन्हें सेक्रेट्री अक़लीयती बहबूद की ज़ाइद ज़िम्मेदारी दी गई थी वो 22 सितंबर ता 4 अक्टूबर 13 दिन की तवील रुख़स्त पर रवाना हुए। उन्हों ने तवील रुख़स्त से वापसी के बाद अगर्चे अपने ओहदा की ज़िम्मेदारी सँभाल ली लेकिन हुकूमत ने अक़लीयती बहबूद का महकमा उन के तफ़वीज़ नहीं किया।

वाइद के मुताबिक़ तवील रुख़स्त से वापसी के बाद हुकूमत ज़ाइद ज़िम्मेदारी से मुताल्लिक़ नए अहकामात जारी करती है लेकिन जनाब अहमद नदीम के मुआमला में इस तरह के कोई अहकामात जारी नहीं किए गए। देखना ये है कि अक़लीयती बहबूद के सेक्रेट्री ओहदा का ये तात्तुल मज़ीद कितने दिन जारी रहेगा।

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