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दो ग़रीब रक्षा रानों की दर्दनाक कहानियों पर मिल्लत का हौसला अफ़ज़ा-ए-रद्द-ए-अमल

हैदराबाद २२। अगस्त : ( नुमाइंदा ख़ुसूसी ) : हैदराबाद की कोई ऐसी सड़क नहीं जिस पर मेरा पसीना ना गिरा हो , पहले की तरह मेरे पाओ में दम नहीं रहा । ये शहर के इन दो ज़ईफ़ और ग़रीब रक्षा रानों के अलफ़ाज़ थे जो उन्हों ने 9 अगस्त को सियासत केनुमाइ

हैदराबाद २२। अगस्त : ( नुमाइंदा ख़ुसूसी ) : हैदराबाद की कोई ऐसी सड़क नहीं जिस पर मेरा पसीना ना गिरा हो , पहले की तरह मेरे पाओ में दम नहीं रहा । ये शहर के इन दो ज़ईफ़ और ग़रीब रक्षा रानों के अलफ़ाज़ थे जो उन्हों ने 9 अगस्त को सियासत केनुमाइंदा ख़ुसूसी से बातचीत करते हुए अदा किए ।

इन दोनों ग़रीब रक्षा रानों 65 सालामुहम्मद यूसुफ़ और नयाज़ मुहम्मद ख़ान 70 साला साकिनान भवानी नगर-ओ-तालाब कटा के बारे में सियासत की 10 अगस्त की इशाअत में नुमाइंदा ख़ुसूसी की एक रिपोर्ट शाय हुई जिस में इन दोनों की दर्द भरी दास्तान ब्यान की गई थी । दलों को छू लेने वाली इस रिपोर्ट से मुतास्सिर हो कर दो हमदरद इन मिल्लत ने मुहम्मद यूसुफ़ और नयाज़ मुहम्मद ख़ां को नए रक्षा दिलाने का पेशकश किया ।

सियासत से रुजू होते हुए हमीद इक़बाल अनजीनर साकन मह्दी पटनम ने बताया कि वो दोनों रक्षा रानों को नए रक्षे दिलाने के लिए तैय्यार हैं । अभी वो ये पेशकश ही कररहे थे कि एक और साहिब ख़ैर ने दफ़्तर सियासत को फ़ोन करते हुए बताया कि वो भी मुहम्मद यूसुफ़ और नयाज़ मुहम्मद ख़ां की मदद के ख़ाहां है और उन्हें रक्षा दिलाने के लिए तैय्यार हैं । जब उन्हें बताया गया कि किसी और साहिब ने ये ज़िम्मेदारी ले ली है तब इन साहिब ने बड़ी ही आजिज़ी से कहा कि वो इस नेक काम में हिस्सा लेना चाहते हैं इस लिए पहले वाले साहिब ख़ैर से बात करें तो बेहतर होगा ।

बहरहाल हमीद इक़बाल अनजीनर से बात की गई तो वो ये कहते हुए राज़ीहुए कि चलो एक नेक काम का सवाब दूसरे भाई को मिल जाएगा जो अच्छी बात है ।चुनांचे हमीद इक़बाल अनजीनर और दुबई से फ़ोन करने वाले साहिब ने एक एक रिक्शा दिलाने का तहय्या करलिया और जमाता उल-विदा के मौक़ा पर बाद नमाज़ जुमा 65 सालामुहम्मद यूसुफ़ और 70 साला नयाज़ मुहम्मद ख़ां को नए रक्षा हवाले कर दिए गए ।

हर रक्षा की तैय्यारी पर 8500 रुपय के मसारिफ़ आए । इस मौक़ा पर इन दोनों की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा । उन लोगों ने सब से पहले अल्लाह ताली का शुक्र बजा लाया कि इस ने उन की ज़िंदगी की सब से बड़ी तमन्ना पूरी की वो 25 और 35 बरसों से ज़ाती रक्षा ख़रीदने के बारे में सोचने से भी गुरेज़ कररहे थे ।

नियाज़ मुहम्मद ख़ां और मुहम्मद यूसुफ़ने बताया कि वो अख़बार सियासत का शुक्रिया अदा करते हैं जिस ने हम जैसे ग़रीबों के बारे में अपने अख़बार में रिपोर्ट शाय की । हम ने कभी ख़ाबों में भी तसव्वुर नहीं किया था कि अख़बार में हमारे बारे में कोई लिखेगा और हमारे हमदरद भाई मदद के लिए आगे आयेंगे । इन रक्षा रां हज़रात ने ये भी कहा कि वो ऐडीटर सियासत जनाब ज़ाहिद अली ख़ां का भी शुक्रिया अदा करते हैं जो मिल्लत के ग़रीब-ओ-नादार उन लोगों के बारे में भी अपनेअख़बार सियासत में रिपोर्टस शाय कररहे हैं । जिन्हें लोग काबिल-ए-तवज्जा ही नहीं समझते थे ।

मुहम्मद यूसुफ़ और नयाज़ मुहम्मद ख़ां ने मज़ीद बताया कि इस ईद पर उन की ख़ुशीयां दोबाला होगईं हैं सियासत के ज़रीया वो उन लोगों का भी शुक्रिया अदा करते हैं जिन्हों ने उन लोगों की मदद की है और दस्त तआवुन दराज़ किया है । नयाज़ मुहम्मद ख़ां और मुहम्मद यूसुफ़ 35 और 25 साल से रक्षा चला रहे हैं । जिस के लिए वो बिलतर्तीब 20 और 15 रुपय रक्षा का यौमिया किराया अदा कररहे थे ।

ख़ानदान की ज़िम्मेदारीयों और दो वक़्त की रोटी के इंतिज़ाम में ये लोग इस क़दर मसरूफ़ होगए थे कि उन्हें कभी अपनाज़ाती रक्षा ख़रीदने का ख़्याल ही नहीं आया । दोनों के घरों में दो , दो नौजवान लड़कीयां बैठी हुई हैं लेकिन नयाज़ मुहम्मद ख़ां और मुहम्मद यूसुफ़ का कहना था कि वो अल्लाह ताली के हर फ़ैसले पर राज़ी हैं ।

वो जो भी करता है इस में बंदा के लिए ख़ैर ही होता है । मुहम्मद यूसुफ़ बवासीर में मुबतला हैं जब कि इन की बीवी बी पी और शूगर की मरीज़ा है लेकिन इन कठिन हालात में भी दोनों रक्षा रां बराबर मेहनत किए जा रहे हैं और कभी भी किसी के आगे हाथ फैलाने की ज़हमत तक नहीं की । बहरहाल अल्लाह ताली ने सियासत के ज़रीया उन लोगों को हमदरद मिल्लत की नज़रों में लाया और देखते ही देखते उन के लिए ज़ाती रक्षा भी तैय्यार हो गए ।

इन रिक्शों की तैय्यारी तीन रोज़ से जारी थी । रिक्शों की बजाय कोई और चीज़ ख़रीदने के बारे में सवाल पर दोनों ने कहा कि उन्हें रक्षे ही चाहीए । क़ारईन सियासत में जो भी रिपोर्ट शाय होती है अल्हम्दुलिल्ला इस का बेहतर असर होता है और दुनिया के कोने कोने से हौसला अफ़ज़ा-ए-रद्द-ए-अमल हासिल होता है ।

इस के लिए बारगाह रब अलाज़त में जितना भी शुक्र अदा किया जाय कम है । सियासत ने अपनी रिपोर्ट के ज़रीया हमेशा मिल्लत के मुस्तक़बिल संवारने की कोशिश की है । उन लोगों की आँखों से आँसू पोंछने और उन के चेहरों पर छाई उदासी मिटाने की कोशिश की है जिन्हें हालात ने रोने और उदास रहने पर मजबूर कर दिया है ।

सियासत ने जहां मिल्लतकी नौजवान नसल में इलमी-ओ-अमली तौर पर आगे बढ़ने तरक़्क़ी की राहें तै करने औरदीगर अब्ना-ए-वतन के शाना बशाना चलने का जज़बा-ओ-शऊर बेदार करने का बीड़ा उठाया है । वहीं मिल्लत को इन सरकारी असकीमात से इस्तिफ़ादा करने की जानिब तवज्जा भी दिलाई है जो सिर्फ और सिर्फ अक़ल्लीयतों की फ़लाह-ओ-बहबूद के लिए शुरू की गईं बालफ़ाज़ दीगर मिल्लत मज़लोमा की तरक़्क़ी-ओ-ख़ुशहाली ही रोज़नामा सियासत का मक़सद-ओ-मंशा-ए-है और क़ारईन की दावो से वो अपने मक़ासिद के हुसूल में बड़ी तेज़ी से आगे ही आगे बढ़ता जा रहा है ।।

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