Friday , April 27 2018

दो हिंदूस्तानी एल यूनीवर्सिटी के आलमी फ़ैलो मुंतख़ब

दो हिंदूस्तानी उन अफ़राद में शामिल हैं जिन्हें बावक़ार एल यूनीवर्सिटी में 2012 में अपने आलमी फ़ैलो मुंतख़ब करते हुए अपने हिंदूस्तानी फ़ैलोज़ की तादाद 11 तक पहुंचा दी है। इस प्रोग्राम का आग़ाज़ 2007 -में किया गया था। यूनीवर्सिटी ने अप

दो हिंदूस्तानी उन अफ़राद में शामिल हैं जिन्हें बावक़ार एल यूनीवर्सिटी में 2012 में अपने आलमी फ़ैलो मुंतख़ब करते हुए अपने हिंदूस्तानी फ़ैलोज़ की तादाद 11 तक पहुंचा दी है। इस प्रोग्राम का आग़ाज़ 2007 -में किया गया था। यूनीवर्सिटी ने अपने एक ब्यान में कहा कि साल 2012 केलिए 16 एल आलमी फ़ैलोज़ मुंतख़ब किए गए हैं जिन में से दो हिंदूस्तानी हैं।

आयूष चौहान , मुआविन बानी मैनेजिंग डायरैक्टर कुइक सैंड और रची यादव सीनीयर प्रोग्राम ऑफीसर हंगर प्राजैक्ट 2012 केलिए एल आलमी फ़ैलो मुंतख़ब किए गए हैं जिस के साथ ही अब तक यूनीवर्सिटी के मुंतख़ब हिंदूस्तानी फ़ैलोज़ की तादाद 11 होगई है। हिंदूस्तान और बर्तानिया दोनों के फ़ैलोज़ की तादाद मसावी यानी फी कस 11 है।

इस प्रोग्राम में 2002 से अब तक जुमला 79 एल आलमी फ़ैलोज़ मुंतख़ब किए जा चुके हैं। चौहान कोइक सैंड के सरबराह हैं जो एक कसीर शोबा जाती डिज़ाइन और ईजादात की मुशावरती कंपनी है जो बिज़नस , तरक़्क़ी और तहज़ीब के शोबा में सरगर्म है, जबकि यादव की तवज्जा ख़वातीन की हिंदूस्तान में बा एख़तयारी की तहरीक , इंसानी हुक़ूक़ पर मर्कूज़ है। इन का पस-ए-मंज़र एडवारटाइज़िंग है।

वो मुंख़बा ख़ातून नुमाइंदा बराए ख़लीजी तबदीली के अलम बरदार कारकुन बराए मुक़ामी इदारा जात और सरकारी मह्कमा जात हैं। अपने ब्यान में एल यूनीवर्सिटी ने कहा कि हर साल 2002 -से यूनीवर्सिटी मिसाली शख़्सियतों को उन के करियर के उरूज के दौर में अपना आलमी फ़ैलो मुंतख़ब करती रही है।

TOPPOPULARRECENT