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दौर-ए-हाज़िर में हर एक फ़ित्ने की जड़ टेली वीज़न

इस्लाह मुआशरा की मुहिम घर से शुरू की जाये , बीदर में जनाब मुहम्मद इस्माईल साहब जामई का ख़िताब

इस्लाह मुआशरा की मुहिम घर से शुरू की जाये , बीदर में जनाब मुहम्मद इस्माईल साहब जामई का ख़िताब
बीदर,15 जनवरी: ( ई मेल ) ख़िताब आम बउनवान इस्लाह-ए-अहल-ओ-अयालअज़ीज़म वासिफ़ जुबैर की क़िरा॔ते कलाम पाक से आग़ाज़ हुआ। बादअज़ां फ़ज़ीलत शेख़ मुहम्मद इस्माईल साहब जामई हिफ्ज़ुल्लाह ख़तीब मस्जिद अबूहुरैरा का और
सेक्यूरिटी मुदर्रिस मुहसिनात ललबनात गुलबर्गा ने अपने ख़िताब आम का आग़ाज़ क़ुरान-ए-पाक की इस आयात करीमा से ए अमान वालो अपने आप को और अपने अहल-ओ-अयाल को जहन्नुम की आग से बचा लो से किया।

उन्होंने दौरान ख़िताब अहल-ओ-अयाल की इस्लाह को मुआशरे की इस्लाह का सबब क़रार दिया , क्यो‍‍‍‍‍‍‍‍कि मुहल्ले का हर घर अगर सुधर जाये तो सारा मुहल्ला सुधर जाएगा और सारे मुहल्ले सुधर जाएं तो सारा शहर सुधर जाएगा, इस तरह पूरी दुनिया का निज़ाम बदल सकता है।

उन्होंने ये भी कहा कि इस्लाह का सब से बहतरीन तरीका वो है जो अल्लाह के रसूल ने इख़तियार किया, उन्होंने नबी करीम
सल्लल्लाहु अलैहि व‌सल्लम की बहुत सारी अहादीस का हवाला देते हुए चंद नसीहतें कीं और कहा कि आदमी सब से ज़्यादा वक़्त काम काज के बाद अपने घर में गुज़ारे और बीवी बच्चों की इस्लाह क़ुरआनी तालीमात और अहादीसे रसूल के ज़रीये करता रहे।

आदमी जब घर में दाख़िल हो सलाम कह कर दाख़िल हो , क्योंकि जो आदमी सलाम के साथ घर में दाख़िल होता है , वो रब की निगहबानी में होता है , और इसी तरह उन की इस्लाह के लिए आदमी चंद मख़सूस औक़ात मुतय्यन करे जिस के अंदर दीनी गुफ़्तगु हो और इस्लामी अख़लाक़ , आदात , तौर तरीके ग़रज़ ये कि सारी ज़िंदगी गुज़ारने के जो अहकामात क़ुरआन हदीस से साबित हैं वो उन के सामने वाज़िह करते रहें। मज़ीद उन्होंने कहा कि मर्द भी सुन्नत‌ नमाज़ों का एहतिमाम घर में किया करें , क्योंकि अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया कि अपनी नमाज़ का कुछ हिस्सा घरों में अदा करो और अपने घरों को क़ब्रिस्तान ना बनाओ दौर-ए-हाज़िर में हर फ़ित्ने की जड़ जिस से आज इंसान का सुकून-ओ-चैन ख़त्म हो गया है , जिस की वजह से आज इंसान को इस बात का भी वक़्त नहीं मिल रहा है कि घर आकर कम अज़ कम बीवी बच्चों से कुछ गुफ़्तगु तो कर सके , मेहमान आए तो मेहमानों से कुछ बात चीत हो सके , वो फ़ित्ने की जड़ है टी वी जो आज एक टी बी के मर्ज़ की तरह इंसान की ज़िंदगी का हिस्सा बन गई है।

लिहाज़ा ज़रूरत इस बात की है कि उस को घर से दूर रखें।और इसी तरह आज नौजवान लड़के और लड़कियों का नासूर मोबाईल फ़ोन जो आज सारी दुनिया में तबाही मचा रखी है वालदैन से ख़ुसूसी गुज़ारिश की कि पहले तो अपनी औलाद को मोबाईल फ़ोन ना दें और अगर शदीद ज़रूरत के तौर पर दें तो उस की सख़्ती से निगरानी करें।

उन्होंने इस शहर में एक बहतरीन चलती हुई मुहिम निकाह को आसान बनाएं पर ख़ुशी का इज़हार करते हुए ये गुज़ारिश की कि इस तरह की मुहिमें हर इंसान को करते रहनी चाहीए , और निकाह को इसी तरह करना चाहीए जिस तरह अल्लाह के रसूल की
सुन्नत है। इस ख़िताब आम के सदारती ख़िताब में मौलाना मुहम्मद मुजीबुर्रहमान क़ासिमी ख़तीब मस्जिद आईशा रज़ीय‌ल्लाहु अनहा ने कहा कि अहल-ओ-अयाल और मुआशरा की इस्लाह सिर्फ़ इस बुनियाद पर हो सकती है , जिस बुनियाद पर
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त‌ ने अल्लाह के रसूल के ज़रीये उस वक़्त जब सारी इंसानियत तारीकी में थी।

ऐन ऐसे ही वक़्त में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त‌ ने जनाब मुहम्मद को क़ुरआन के नुज़ूल के साथ नबुव्वत अता की , जिस में रब ने हुक्म दिया कि अल्लाह के नबी आप इस किताब के ज़रीये लोगों की इस्लाह कीजिए जिस के बाद लोगों की ऐसी इस्लाह हो गई इस
क़ुरआन-ओ-हदीस के ज़रीये कि उस वक़्त के लोगों मे इन‌ बराईयों मेंसे कोई बुराई नहीं थी , अगर आज भी हम चाहते हैं कि हमारे घर की और मुआशरे की इस्लाह हो तो फिर क़ुरआन-ओ-हदीस की वाज़िह तालीमात को अपनाएं।

इस ख़िताब आम की निज़ामत शाह नज‌मुद्दीन उर्फ़ राशिद कादरी ने बहुस्न-ओ-ख़ूबी अंजाम दी और कलिमात तशक्कुर अदा करते हुए तमाम मेहमानों का ख़ुसूसन मेहमान मुक़र्रर शेख़ मुहम्मद इस्माईल साहब जामई हिफ़्ज़ुल्लाह और मेहमानान ख़ुसूसी जनाब मुहम्मद अब्दुलमाजिद साहब एग्रीकल्चर ऑफीसर-ओ-इंचार्ज डिस्ट्रिक्ट माइनारेटी एंड वेलफ़ेर ऑफीसर , बीदर और जनाब मुहम्मद शुजाउद्दीन साहब नामा निगार मुंसिफ़ बीदर का शुक्रिया के साथ साथ उन के बहतरीन ख़िदमात पर तहनियत भी पेश की गई और तमाम हाज़रीन का इसी तरह से प्रिंट मेडा और इलेकट्रानिक मीडिया , का उन्होंने शुक्रिया अदा किया।

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