Friday , December 15 2017

धर्म के नाम पर वोट मांगने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक सराहनीय: मौलाना अरशद मदनी

नई दिल्ली: जमीअत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने आज सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय पीठ के माध्यम से चुनाव के दौरान धर्म, जाति, संप्रदाय और भाषा के नाम पर वोट मांगे जाने को असंवैधानिक और अवैध करार दिए जाने के फैसले का स्वागत किया है।

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न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार एक प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब उन सांप्रदायिक ताकतों को लगाम दी जा सकेगी जो चुनाव के दौरान धर्म और जाति के नाम पर वोट मांग कर लोकतांत्रिक वातावरण को गंदा करती रही हैं और किसी विशेष धर्म या समुदाय के लोगों को टारगेट  करके चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करती रही हैं।

मौलाना मदनी ने कहा कि जमीअत उलेमा ए हिंद हमेशा इसके खिलाफ रही है। स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान भी जमीअत ने धर्म, जाति और भाषा के नाम पर आंदोलन चलाने या राजनीति करने का विरोध किया था और उसका सबसे बड़ा सबूत दो क़ौमी नज़रिए का विरोध करना था। जमीअत उलेमा ए हिंद आज भी अपने इस रुख पर कायम है और उस का मानना ​​है कि वोट डालना हर भारतीय नागरिक का संवैधानिक अधिकार है न कि धार्मिक। इसलिए चुनाव के दौरान धर्म, जाति और भाषा के नाम पर वोट मांगना एक तरह से पूर्वाग्रह और सांप्रदायिकता को बढ़ावा देना है, जैसा कि अब तक भाजपा जैसी राजनीतिक पार्टियां धर्म के नाम पर देश के बहुसंख्यक समुदाय को एकजुट करने की कोशिश कर देश की जनता के बीच धर्म के नाम पर एक खाई पैदा करने की कोशिश करती रही हैं।

मौलाना मदनी ने कहा कि धर्म या जाति हमारी अपनी निजी पहचान है जबकि संवैधानिक रूप से हम सभी भारतीय नागरिक हैं। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया अनिवार्य है, ऐसे में हम चुनाव के दौरान हिंदू मुस्लिम सिख या ईसाई नहीं है लेकिन एक भारतीय के रूप में सोच समझकर और देश तथा राष्ट्र के विकास और हितों को ध्यान में रखते हुए ही फैसला करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्ट निर्णय के बाद अब किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनाव के दौरान धर्म और जाति के नाम पर मतदाताओं से अपील जारी करना, उन्हें गुमराह करना और इसका राजनीतिक लाभ हासिल करना असंभव हो जाएगा .अब यह जिम्मेदारी चुनाव आयोग ऑफ इंडिया की है वह सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ लागू कराए और उल्लंघन करने वाली राजनीतिक पार्टियों के साथ कतई कोई अपवाद नहीं बरती जाए।

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