धाबोल्कर क़त्ल: पुने में बंद, धमाकों के मुक़ाम पर क़त्ल हैरतअंगेज़

धाबोल्कर क़त्ल: पुने में बंद, धमाकों के मुक़ाम पर क़त्ल हैरतअंगेज़
इंसिदाद इलजाम‌ के ख़ातमा के लिए ज़बरदस्त तहरीक चलाने वाले समाजी कारकुन नरेंद्र धाबोल्कर के क़त्ल पर बतौर-ए-एहतजाज सियासी और समाजी तंज़ीमों ने आज पुने बंद का ऐलान किया।

इंसिदाद इलजाम‌ के ख़ातमा के लिए ज़बरदस्त तहरीक चलाने वाले समाजी कारकुन नरेंद्र धाबोल्कर के क़त्ल पर बतौर-ए-एहतजाज सियासी और समाजी तंज़ीमों ने आज पुने बंद का ऐलान किया।

इस मौके पर तलबा और दीगर शहरियों ने एक एहितजाजी मार्च का भी एहतिमाम किया। याद रहे कि नरेंद्र धाबोलकर हमेशा से इसके ख़ाहां रहे कि महाराष्ट्रा में काले जादू और इंसिदाद तो हम परस्ती(अंधविश्वास) के लिए एक बिल को मंज़ूरी दी जाये। पुलिस को अब तक क़ातिलों का कोई पता नहीं चला है जबकि एक मुल्ज़िम का ख़्याली ख़ाका जारी किया गया है।

हालाँकि पुलिस यही कह‌ रही है कि उसे कुछ अहम मालूमात हासिल हुई है लेकिन तफ़सीलात बताने से ये कह कर इनकार कर दिया कि इससे तहक़ीक़ात की राह में रुकावटें पैदा होसकती हैं। इसके बाद‌ एक आला सतही पुलिस ओहदेदार ने अख़बारी नुमाइंदों से बात करते हुए कहा कि अब तक क़ातिलों का पता नहीं चला है और इस मुआमले की हर नजरया से तहक़ीक़ात की जा रही है।

69 साला धाबोल्कर को मोटर साईकल पर सवार दो नामालूम हमला आवरों ने गोली मारकर क़त्ल कर दिया था। उस वक़्त धाबोल्कर सुबह की चहलक़दमी के लिए घर से बाहर निकले थे। इस मौके पर सी पी आई ने भी नरेंद्र धाबोल्कर की हलाकत की अदालती तहक़ीक़ात करवाने का मांग‌ किया।

सी बी आई क़ाइद गुरु दास दास गुप्ता ने वज़ीर-ए-आला महाराष्ट्रा पृथ्वी राज चौहान के नाम तहरीर करदा एक मकतूब में कहा कि नरेंद्र धाबोल्कर को दाएं बाज़ू की तर्ज़ फ़िक्र रखने वालों ने हलाक किया होगा। उनका क़त्ल एक नुक़्सान है। लिहाज़ा में आप से अपील करता हूँ कि इस क़त्ल की अदालती तहक़ीक़ात का हुक्म दिया जाये और ख़ातियों को सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाये क्योंकि ये काम किसी फ़र्द-ए-वाहिद का नहीं है।

दूसरी तरफ़ कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी दिग विजय‌ सिंह से भी धाबोल्कर के क़त्ल की ज़बरदस्त मुज़म्मत की और कहा कि इस क़त्ल के पसेपुश्त(पीछे) मुहर्रिकात और ख़ातियों को जल्द से जल्द मंज़रे आम पर लाया जाये। उन्होंने खासतौर पर कहा कि क़त्ल का वाक़िया एक ऐसे मुक़ाम पर रुनुमा हुआ है जहां इससे पहले बम धमाके भी होचुके हैं।

याद रहे कि 2010 में पुने बम धमाकों में दाएं बाज़ू की कुछ अस्करियत पसंद तंज़ीमों के मुलव्वस होने का उजागर‌ हुआ था।

Top Stories