Sunday , December 17 2017

धीरे-धीरे करीब आ रहे हैं कांग्रेस और बसपा

नई दिल्ली। शनिवार को विभिन्न राज्यों में हुए राज्यसभा चुनाव के बारे में भिन्न-भिन्न राजनीतिक विश्लेषकों का अपना-अपना मत है। ये चुनाव राजस्थान, उत्तराखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक आदि राज्यों में हुए। उत्तर प्रदेश में कपिल सिब्बल राज्यसभा चुनाव जीत चुके हैं। सिब्बल को प्रथम वरीयता के 25 वोट मिले। बसपा ने इस चुनाव में सभी दलों से दूरी बनाए रखी। इस दूरी से सिब्बल को फायदा पहुंचा क्योंकि अगर ये बसपा अपने वोट भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति महापात्रा के पक्ष में दे देती तो कांग्रेस को नुकसान हो सकता था।

बसपा ने अपने 12 अतिरिक्त वोट किसी को नहीं देने का फैसला किया। बेशक बसपा ने खुले तौर पर कांग्रेस का समर्थन नहीं किया लेकिन उसका किसी और को समर्थन न करना सिब्बल के लिए संजीवनी बन गया। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि जरूरत पड़ी तो बसपा और कांग्रेस साथ-साथ आ सकते हैं। वैसे चुनावी राज्य पंजाब में भी ऐेसी संभावना कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने जताई है। चलिए ये तो भविष्य के गर्भ में छिपा है कि कौन किसके साथ गठबंधन करेगा या अलग-अलग चुनाव लड़ेगा।

कांग्रेस की लाज पहले भी बसपा उत्तराखंड में बचा चुकी है। जब हरीश रावत ने शक्ति परीक्षण में अपना बहुमत साबित करना था तो तब भी बसपा ने खुले तौर ने रावत को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी।

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