Monday , December 18 2017

धूल पेट में हिन्दू वाहिनी के नौजवानों की पुलिस में भर्ती केलिए ट्रेनिंग

अब्बू अमल -बात उस वक़्त तशवीशनाक होजाती है जब पुलिस में भर्ती होने वाले नौजवान किसी मख़सूस अंदाज़ फ़िक्र के लोगों के होते हैं, जो मुलक के सैकूलर और जमहूरी किरदार के लिए ख़तरनाक होती है। आप जो तस्वीर देख रहे हैं वो हमारे मुल्क में सारी

अब्बू अमल -बात उस वक़्त तशवीशनाक होजाती है जब पुलिस में भर्ती होने वाले नौजवान किसी मख़सूस अंदाज़ फ़िक्र के लोगों के होते हैं, जो मुलक के सैकूलर और जमहूरी किरदार के लिए ख़तरनाक होती है। आप जो तस्वीर देख रहे हैं वो हमारे मुल्क में सारी रियासत की पुलिस की नहीं है बल्कि हिन्दू वाहिनी के कारकुनों की है जो सिंह परिवार का एक अटूट हिस्सा हैं।

जिन्हें धूल पेट में अलल-सुबह पुलिस कांस्टेबल या ऐस आई की फ़िज़ीकल ट्रेनिंग दी जा रही है। ये उन के मुस्तक़बिल में पुलिस वाले बनने की तमहीद है, जो आगे चल कर पुलिस के ज़िम्मेदार ओहदों को सँभालेंगे। हमारे ज़राए से मालूम हुआ कि धूल पेट में इस तरह का काम चल रहा है तो हमारा तजस्सुस जाग उठा। वैसे उस की तमाम तर तफ़सीलात हिन्दू वाहिनी की वैब साईट पर भी दस्तयाब हैं। हम ने भी इंटरनैट की मदद से मालूमात हासिल कीं क्योंकि एक अरसा-ए-दराज़ से ये आवाज़ उठती रही कि मुस्लिम दुश्मन भगवा किस्म के लोग पुलिस में मौजूद हैं। हिन्दू वाहिनी ने फेसबुक पर भी अपनी पुलिस ट्रेनिंग की तफ़सील और तफ़सीलात मुकम्मल पेश की हैं।

यहां तक कि फ़ोन नंबरात भी दिए हैं ताकि अगर कोई हिन्दू दिलचस्पी रखता हो तो रब्त पैदा करसके। तफ़सीलात में हिन्दू वाहिनी के चंद ज़िम्मेदारों के नाम भी दिए गए हैं, इन में से एक नाम राजा सिंह लोधे का भी है। इन की तस्वीर और बायो डाटा भी मौजूद है। क़ारईन इस तस्वीर को ग़ौर से देखिए मुकम्मल पुलिस यूनीफार्म में ट्रेनिंग दी जा रही है। इन लड़कों के पीछे आर ऐस इससे ताल्लुक़ रखने वालों को भी चडी पहने हुए लड़कों के साथ देखा जा सकता है। अब इस तरह के ज़हर आलूद मुस्लिम दुश्मन अनासिर या नौजवान जब महिकमा पुलिस में भर्ती होंगे तो इस का क्या नतीजा निकलेगा। ये सब ही जानते हैं। सब से पहली बात तो ये है कि यही लोग बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों को मुख़्तलिफ़ केसेस में माख़ूज़ करते हैं।

कई साल जेलों में महरूस रखते हैं जिस की वजह से उन के ख़ानदान वाले अदालतों के चक्क्रें काटते हैं। अपने गाड़े पसीना की कमाई मुक़द्दमात में ख़र्च करने पर मजबूर होजाते हैं। बरसों इन का पुर्साने हाल कोई नहीं होता। वकीलों के घरों के चक्क्र लगाते लगाते उन की जूतीयां घुस जाती हैं। इस से पहले ऐसे कई वाक़ियात हुए जिन में शहर के अतराफ़ फ़ार्म हाइज़ों में इन नौजवानों को तरह तरह की अज़ीयत पहुंचाई गई। इन सब बातों का तसव्वुर भी मुश्किल है। अगर मुस्लिम दुश्मन अफ़राद महिकमा पुलिस में यूंही जगह पाते रहें तो पुलिस की ग़ैर जांबदारी पर दाग़ लग जाएगा।

पुलिस की कई शाख़ें हैं, स्पैशल ब्रांच, एनटलीजनस वग़ैरा । सवाल ये पैदा होता है के किया हिन्दू वाहिनी की वैब साईट, फेसबुक पर उन की नज़र नहीं पड़ी। अगर नज़र पड़ी तो फिर क्यों ख़ामोशी इख़तियार की गई। इंटरनैट पर तो सारी सरगर्मीयां मौजूद हैं। राबिता के लिए टेलीफ़ोन नंबर मौजूद हैं। ज़िम्मेदार अफ़राद की तसावीर मौजूद हैं। इन अनासिर पर कड़ी नज़र रखने की ज़रूरत है जो शहर की पुरअमन फ़िज़ा-ए-को बिगाड़ना चाहते हैं। मुनाफ़िरत के बीज बौना चाहते हैं। एलेकटरानिक तेलगु मीडीया आंधरा की लॉबी के हाथ में है। हालात ठीक नहीं हैं।

हर तरफ़ अफ़्वाहों का बाज़ार गर्म है। इन हालात में बाअज़ मख़सूस अंदाज़ के चयानलस से जिन का ताल्लुक़ मख़सूस ज़बान से है जिस की नौईयत मज़हबी है, हिंदूतवा की परज़ोर हामी रथमबरा की इश्तिआल अंगेज़ तक़ारीर के कैसेट पेश किए जा रहे हैं। ज़हनों को आलूदा किया जा रहा है। इन तक़ारीर से कैसी मुनाफ़िरत फैलेगी इस का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। इस में कोई शक नहीं कि पुलिस कमिशनर ने काबिल-ए-तारीफ़ अंदाज़ में ला ऐंड आर्डर को क़ाबू में रखने केलिए बंद-ओ-बस्त किया है जो मोसिर भी साबित होरहा है, लेकिन इंटरनैट के ज़रीया जो मख़सूस अंदाज़ की ज़हन साज़ी की जा रही है वो पुलिस बंद-ओ-बस्त से नहीं हटाई जा सकती। मीडीया की रसाई उस की पहुंच तो घर घर है।

ऐसे में इस का इंसिदाद मुश्किल है लेकिन बेहद ज़रूरी है। ला ऐंड आर्डर की बरक़रारी में अवाम को भी पुलिस का साथ देना पड़ेगा। पुलिस बहरहाल एक इंसानी इदारा है लेकिन ज़हर आलूद अंदाज़ में ज़हन साज़ी के अमल को तो पुलिस रोक सकती है। इंतिज़ामात तो ज़ाहिरी तौर पर होते हैं लेकिन ज़हन खु़फ़ीया तौर पर बनाया जाता है।

TOPPOPULARRECENT