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नई एजुकेशन पॉलिसी के लिए ABVP का नया एजेंडा, योग और संस्कृत पर जोर

दिल्ली : ABVP ने मातृभाषा में शुरूआती तालीम बल देते हुए 20 नुकाती एजेंडा मानव संसाधन मंत्रालय को भेजा है। एबीवीपी ने सेंट्रल युनिवर्सीटी में हिन्दी और संस्कृत से तालीम निजाम के साथ साथ योग, आयुर्वेद, संस्कृत और आध्यात्म को केंद्र में रखकर आला तालीम का अंतरराष्ट्रीयकरण करने, विदेशी स्टूडेंट्स को अट्रेक्ट करने और ‘भारत’ पर लाज्मी बुनियादी पाठ्यक्रम की मांग की है।

एक अंग्रेज समाचार में छपी खबर के मुताबिक, 20 नुकाती एजेंडे की ये कुछ अहम बातें हैं। एबीवीपी के एजेंडे के दस्तावेज के मुताबिक, सेंट्रल यूनिवर्सीटी को हिन्दी और संस्कृत में तालीम देने में अपनी कीरदार निभानी चाहिए। विदेशी और क्षेत्रीय भाषाओं के हिंदी और संस्कृत में अनुवाद का काम एक मिशन के तहत होना चाहिए।

राष्ट्रीय एकीकरण और भारतीय संस्कृति को मरकजी अदारों में जरूर बढ़ावा मिलना चाहिए आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी ने सिफारिश की है कि नियंत्रक ईकाइयों को अदारों में भारतीय भाषाओं में अध्यापन शुरू करने को तर्जीह देनी चाहिए।

लैग्वेज से जरीए से सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देने की वकालत करते हुए एबीवीपी ने कहा है कि मरकज की तरफ से चल रहे तमाम अदारों को हिंदी में अध्ययन-अध्यापन शुरू करना चाहिए और अगर मुमकीन हो तो रियासतों के भाषाओं में भी ऐसा करना चाहिए।

हिन्दी या दिगर जुबान में पढ़ाने पर एबीवीपी का कहना है कि भारतीयों को उनकी मातृभाषा में अध्ययन करने की इजाजत नहीं होने की वजह से वे हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैं क्योंकि वे अंग्रेजी में बेहतर नहीं हैं।

इसके अलावा एबीवीपी ने ‘भारत पर एक बुनियादी पाठ्यक्रम’ शुरू करने की सलाह दी है, जिसमें शास्त्र, इतिहास, संस्कृति, दर्शन और प्राचीन भारतीय इतिहास की जीवन शैली होनी चाहिए। ऐसे पाठ्यक्रम सभी आला तलीमी पाठ्यक्रमों में लाज्मी तौर पर शामिल किया जाना चाहिए।

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