Friday , December 15 2017

नए साल के जश्न और शैतानी हरकात से अपने बच्चों को बचाएं

हैदराबाद 31 दिसंबरः ज़िंदगी बहुत तेज़ी के साथ गुज़र रही है। माओं के गोद में खेलने वाले बच्चे देखते ही देखते घरों में खेलने लगे हैं। गिर गिर कर चलने वाले मासूम बड़े हो गए हैं और जो बड़े हो चुके थे वो अपनी अपनी ज़िन्दगियों में मसरूफ़ हो गए हैं जब कि अधेड़ उम्र के लोग ज़ईफ़ी की जानिब आगे बढ़े जा रहे हैं। यानी ज़िंदगी मौत की तरफ़ बढ़ रही है। हर नए लम्हा नए मिनट नए घंटे नए दिन और नए साल के साथ हमारी ज़िंदगी का लम्हा, मिनट घंटा, दिन, माह और साल कम होता जा रहा है।

इस के बावजूद हमें ज़िंदगी पूरी दियानतदारी के साथ गुज़ारनी होगी। एक ऐसी ज़िंदगी जिस में जोश और वलवला हों उमंग और आरज़ू हो। हंसते खेलते ज़िंदगी गुज़ारने में कोई क़बाहत नहीं बल्कि ऐसी ज़िंदगी गुज़ारना तो इंसानों की ख़ुशक़िस्मती है ताहम नए साल का इंतिहाई मनचले अंदाज़, तूफ़ान बदतमीज़ी बरपा करते हुए जानवरों जैसी चीख और पुकार, और शैतानी हरकतों के ज़रीए अगर कोई इस्तिक़बाल करता है तो समझिए कि वो इंतिहाई बदबख़्त और बदनसीब है।

हर साल के आख़िरी दिन यानी 31 दिसंबर की रात 9 बजे से ही हमारे शहर के चंद मुक़ामात बिलख़सूस हुसैन सागर, नेक्लिस रोड पर नौजवान लड़के लड़कियां ऐसी चीख और पुकार करते हैं जैसे उन की ज़िंदगी में कोई इन्क़िलाब बरपा हो गया हो।

उन के साथ ऐसा कुछ गुज़रा हो जिस से वो दुनिया के सब से ख़ुश नसीब और ख़ुशहाल इंसान बन गए हों। उन की ख़तरनाक शोर शराबे से देख कर ऐसा महसूस होता है कि शैतान करीब के किसी कोने में ठहरा क़हक़हा बुलंद कर रहा है और उन नौजवान लड़के लड़कियों को ये कहते हुए शाबाशी दे रहा हो कि शाबाश मेरे पिट्ठू तुम ने आज मुझे ख़ुश कर दिया।

तुम्हारी तरह नए साल के इस जश्न, चीख और पुकार, शराबनोशी, मौज मस्ती रक़्स की महफ़िलों और जाबेजा गुनाहों के इर्तिकाब का हर साल मुझे भी बड़ा बेचैनी से इंतेज़ार रहता है क्यों कि तुम्हारी इन हरकतों से अल्लाह नाराज़ और में ख़ुश होता हों। इस लिए वालिदैन और सरपरस्तों को चाहीए कि नए साल के आग़ाज़ से क़ब्ल 31 दिसंबर को अपने बच्चों पर ख़ुसूसी तवज्जा दें।

मोटर सैक़िलें वगैरह तो क़तई ना दें क्युंकि ट्रैफिक और इस में नौजवानों का बेक़ाबू तेज़ रफ़्तार गाड़ियां चलाना मौत को दावत देने के मुतरादिफ़ होता है। बहरहाल हर किसी को साल 2014 के इस्तिक़बाल के मौक़ा पर चौकस और चौकन्ना रहना चाहीए। वर्ना नया साल का अख़िरी दिन हमारी ज़िंदगी का बदतरीन दिन साबित हो सकता है।

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