Wednesday , December 13 2017

नकली नोट छापने वाला गिरोह का भंडाफोड़

नकली नोट छापने वाले एक इंटरनेशनल गिरोह का पटना पुलिस ने पीर को भंडाफोड़ किया है। रंगदारी सेल ने नकली नोट चलाते वक़्त शैलेंद्र कुमार (बिंद, नालंदा) और सुदर्शन मिश्र (सरमेरा, नालंदा) को गिरफ्तार कर इसका खुलासा किया है। पुलिस टीम ने सु

नकली नोट छापने वाले एक इंटरनेशनल गिरोह का पटना पुलिस ने पीर को भंडाफोड़ किया है। रंगदारी सेल ने नकली नोट चलाते वक़्त शैलेंद्र कुमार (बिंद, नालंदा) और सुदर्शन मिश्र (सरमेरा, नालंदा) को गिरफ्तार कर इसका खुलासा किया है। पुलिस टीम ने सुदर्शन को पंडारक, जबकि सरगना शैलेंद्र को बिहारशरीफ के लहेरी इलाके से पकड़ा। इन दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने लहेरी में छापा मारा। यहां से सौ-सौ रुपए के दो लाख के जाली नोट, नोट छापने वाली मशीन, एक लैपटॉप और 10 पीस असली सौ के नोट मिले। एसएसपी जितेंद्र राणा ने बताया कि इस गिरोह का नेटवर्क नेपाल, बांग्लादेश, बिहार के कई जिलों और दूसरे रियासतों से भी हैं।

नकली नोट छापने और इसे बाजार में चलाने वाले गिरोह में कई लोग हैं। सबका काम बंटा हुआ है। बिलकुल प्रोफेशनल अंदाज में इस गिरोह को चलाया जाता है। एसएसपी ने बताया कि शैलेंद्र नकली नोट छापकर उसे सुदर्शन के हवाले कर देता है। नकली नोटों को बाजार में चलाने की जिम्मेदारी सुदर्शन की थी। नकली नोट देही इलाकों, पशु बाजार, पेट्रोल पंप और दीगर जगहों पर चलाए जाते थे। नकली नोट छापने वाले शैलेंद्र के लैपटॉप की जांच की जाएगी। लैपटॉप को खंगालने पर इस रैकेट से जुड़े दीगर मुजरिमों के नाम का खुलासा हो सकता है।

कलर प्रिंटर से छापता था नोट

नकली नोट के साथ पकड़ा गया शैलेंद्र कुमार कलर प्रिंटर पर नकली नोट की छपाई करता था। असली नोट को स्कैन करने के बाद उसे लैपटॉप के फोटोशॉप में डालकर प्रिंट तैयार करता था। उसके बाद उसे कलर प्रिंटर से कॉपी कर नकली नोट तैयार करता था। बाद में तैयार नोटों की इस तरह कटिंग की जाती थी कि वह बिल्कुल असली नोट से दिखते थे। उसके पास से जो कलर प्रिंटर व स्कैनर मिले हैं, वह काफी महंगे व हाइ क्वालिटी के हैं। इसी वजह से इससे तैयार नकली नोट हूबहू असली लगते हैं। असली व नकली नोट में फर्क सिर्फ इतना ही है कि दोनों के कागज में फर्क है।

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