नक़ल नवीसी : जामिआ मिलिया को रहनुमा या ना ख़ुतूत वज़ा करने अदालत की हिदायत

नक़ल नवीसी : जामिआ मिलिया को रहनुमा या ना ख़ुतूत वज़ा करने अदालत की हिदायत
नई दिल्ली, १३ जनवरी: (पी टी आई) दिल्ली हाइकोर्ट ने जामिआ मिलीया इस्लामीया यूनीवर्सिटी को हिदायत की है कि वो इन तलबा-ए-से निमटने केलिए जो इमतिहानात के दौरान नक़ल नवीसी करते हुए पकड़े जाते हैं, मुनासिब रहनुमा या ना ख़ुतूत वज़ा करे।

नई दिल्ली, १३ जनवरी: (पी टी आई) दिल्ली हाइकोर्ट ने जामिआ मिलीया इस्लामीया यूनीवर्सिटी को हिदायत की है कि वो इन तलबा-ए-से निमटने केलिए जो इमतिहानात के दौरान नक़ल नवीसी करते हुए पकड़े जाते हैं, मुनासिब रहनुमा या ना ख़ुतूत वज़ा करे।

जस्टिस हेमा कोहली ने ये हिदायत दी। इस वक़्त उन के इल्म में ये वाक़िया लाया गया था जहां एमबी ए साल दोम के एक तालिब-ए-इल्म सैयद अरशद हुसैन को सिर्फ इस लिए आगे की जमात में तरक़्क़ी नहीं दी गई क्योंकि इदारे के मुताबिक़ अरशद ने इमतिहान में कामयाबी के लिए ग़ैर दयानतदाराना रास्ता इख़तियार किया था, लेकिन यूनीवर्सिटी हुक्काम ने अरशद के ख़िलाफ़ अपने इल्ज़ाम को साबित नहीं किया।

जज ने यूनीवर्सिटी को हिदायत दी कि वो अरशद को तरक़्क़ी देते हुए उसे फाईनल इमतिहानात तहरीर करने की इजाज़त दी। यूनीवर्सिटी के लिए ज़रूरी है कि वो नक़ल नवीसी जैसी लानत से निमटने रहनुमा या ना ख़ुतूत वज़ा करे और इस पर सख़्ती से अमल आवरी करे।

जस्टिस कोहली ने कहा कि वाइस चांसलर की ये ज़िम्मेदारी है कि वो रहनुमा या ना ख़ुतूत वज़ा करे और उन्हें वर्कियों की शक्ल में तबा करवाकर इमतिहानात से मरबूत ओहदेदारों के दरमयान तक़सीम करे। अदालत ने नक़ल नवीसी के मुआमला को यूनीवर्सिटी की जानिब से ग़ैर ज़िम्मा दाराना अंदाज़ में निमटे जाने पर अफ़सोस और हैरत का इज़हार किया, जिस से ज़ाहिर होता है कि इमतिहानी कमेटी ने इस मुआमला की तहक़ीक़ात में अपने ज़हन का इस्तेमाल ही नहीं किया।

अदालत ने दरअसल नक़ल नवीसी केलिए लाए गए मीटरील का हवाला दिया जो अरशद के पास से बरामद हुआ, लेकिन नक़ल नवीसी के इस मटेरियल को अरशद के ख़िलाफ़ की जाने वाली तहक़ीक़ात के दौरान पेश नहीं किया गया था। अरशद ने यूनीवर्सिटी के फ़ैसला को अदालत में चैलेंज किया था, जिस पर अदालत ने यूनीवर्सिटी को मज़कूरा बाला हिदायत दी।

अरशद ने वाज़िह तौर पर कहा था कि नक़ल नवीसी के इल्ज़ाम को यूनीवर्सिटी हुक्काम साबित करने में नाकाम होचुके हैं। लिहाज़ा इस के प्रोमोशन को रोकने का कोई क़ानूनी जवाज़ मौजूद नहीं है।

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