नक्सलियों के अहम ठिकाने के पास पहुंची फ़ोर्स

नक्सलियों के अहम ठिकाने के पास पहुंची फ़ोर्स
रांची 5 जुलाई : लातेहार के कुमंडीह में पुलिस ऑपरेशन जाल-चार जुमेरात देर रात तक जारी रहा। मुहीम में लगे जवान मुसलसल नक्सलियों के अहम ठिकाने की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं पुलिस को रोकने के लिए नक्सलियों की तरफ से मुसलसल लैंड माइनस धमाका क

रांची 5 जुलाई : लातेहार के कुमंडीह में पुलिस ऑपरेशन जाल-चार जुमेरात देर रात तक जारी रहा। मुहीम में लगे जवान मुसलसल नक्सलियों के अहम ठिकाने की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं पुलिस को रोकने के लिए नक्सलियों की तरफ से मुसलसल लैंड माइनस धमाका किया जा रहा है। पुलिस अफसरों का मानना है कि नक्सलियों के पास भागने के मौके कम होते जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही नक्सलियों के अहम कैंप पर पुलिस का कब्जा होगा।

पीएलजीए को पीएलए में तब्दील

भाकपा माओवादी तंजीम ने अपने लड़कू दस्ता पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) को ख़त्म कर दिया है। अब पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) बनाया है। दोनों के काम करने में फर्क है, जो पुलिस को परेशान करनेवाला है। जानकारी के मुताबिक, पीएलजीए का दस्ता अलग-अलग घूमता था। एक दस्ते में 30-40 हथियारबंद नक्सली होते थे। दस्ता के काम करने का तरीका यह था कि छोटे-छोटे समूहों में घूमो और जहां पुलिस कमजोर मिले, हमला कर नुकसान पहुंचाओ। जहां पुलिस मजबूत रहे, वहां से भाग जाओ। हाल में पुलिस के जवान ज्यादा तादाद में निकलने लगे। जिस वजह से पीएलजीए के दस्ते हमला नहीं कर पा रहे थे। इस वजह से तंजीम ने फैसला लिया कि पीएलजीए की जगह पीएलए बनाया जाये।

कुमंडीह में पीएलए की बटालियन

पीएलए में एक बटालियन साथ रहती है। एक बटालियन में 350-400 हथियारबंद नक्सली होते हैं। नक्सलियों की तादाद ज्यादा रहने से पुलिस के जवानों का मुकाबला आसान होता है। कुमंडीह जंगल में पीएलए का ही बटालियन घिरा हुआ है।

नक्सलियों की सप्लाइ लाइन काटी

जुमेरात को मुहीम के 10वें दिन पुलिस अफसरों ने बताया कि ऑपरेशन अभी जारी रहेगा। डीजीपी राजीव कुमार, एडीजी स्पेशल ब्रांच रेजी डुंगडुंग और सीआरपीएफ के आइजी एमवी राव हर दिन ऑपरेशन की जायजा कर रहे हैं। आइजी एमवी राव ने बताया कि कुमंडीह स्टेशन व पहाड़ी के आसपास के इलाके में पुलिस फ़ोर्स तैनात है। नक्सलियों तक राशन-पानी नहीं पहुंच रहा है।

दिसंबर से जमे हैं नक्सली

बुध को पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली थी। जवान पहाड़ी के ऊपर बने नक्सली कैंप से पहले बने गार्ड कैंप बर्बाद करने में कामयाब रहे थे। जानकारी के मुताबिक नक्सलियों का दस्ता पिछले दिसंबर माह से कुमंडीह पहाड़ी पर है। वहां ट्रेनिंग कैंप चल रहा था। पुलिस मुहीम शुरू होने के बाद ट्रेनिंग का काम रुक गया है।

पहाड़ियों पर चढ़ना मुश्किल

ऊंची पहाड़ियों की जिस पहाड़ी पर नक्सली जमे हुए हैं, वह करीब 18 किमी लंबी और 13 किमी चौड़ी है। नीचे चारो तरफ दो दर्जन छोटे-बड़े गांव हैं। इनमें लुंडी, कोदाग, जेर, बड़काडीह, कुमंडीह, कुकू, कुरुमकेला गांव शामिल हैं। किसी भी तरफ से पहाड़ी की ऊंचाई समंदर की सतह से 600 से 800 मीटर है।

ऑपरेशन जाल-चार, 10वां दिन

कुमंडीह स्टेशन को पुलिस ने कब्जे में किया। यहां से नक्सलियों तक खाने पिने की सामान पहुंचायी जाती थी। रसद की फराहम बंद हो गयी है। पहाड़ी के आसपास के गांवों में पुलिस की तैनाती। नक्सली नीचे नहीं आ पा रहे हैं। पहाड़ी के चारो तरफ के रास्तों पर पुलिस फोर्स की तैनाती की गयी है। पुलिस का दावा है कि हथियार से लैस नक्सली का निकल भागना मुश्किल।

== शुक्रिया प्रभात खबर ==

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