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नक्सल मुतास्सिरा इलाक़ों में जंगलात की कटाई से सब्ज़ा ज़ार में कमी

नक्सल (माओवादियों) से मुतास्सिरा ( पीड़ित) इलाक़ों में जंगलात के सफाए के सबब सब्ज़ा ज़ार (हरा भरा) अहाता में गिरावट पेश आई है और उन इलाक़ों में नक्सलाईटस की खु़फ़ीया पनाह गाहों में भी कमी वाके हुई है। लोक सभा को इस बात से वाक़िफ़ (जानकारी)

नक्सल (माओवादियों) से मुतास्सिरा ( पीड़ित) इलाक़ों में जंगलात के सफाए के सबब सब्ज़ा ज़ार (हरा भरा) अहाता में गिरावट पेश आई है और उन इलाक़ों में नक्सलाईटस की खु़फ़ीया पनाह गाहों में भी कमी वाके हुई है। लोक सभा को इस बात से वाक़िफ़ (जानकारी) करवाया गया।

वज़ीर माहौलियात और जंगलात जयंती नटराजन ने वक़फ़ा सिफ़र (मध्यांतर) के दौरान लोक सभा को इस बात से वाक़िफ़ करवाते हुए कहा कि मुल्क में जंगलात के इलाक़ा में ज़बरदस्त कमी वाके ( जरूर) हुई है। इसकी वजह नकसलाईट ( माओवादी) इलाक़ों में इन की खु़फ़ीया पनाह गाहों की तलाशी के लिए जंगलात की कटाई असल वजह है।

अर्जुन राय (जे डी यू) ने कहा कि जंगलात का अहाता ( क्षेत्र) मुल्क में कम हो चुका है और 180 कीलोमीटर जंगलात सिर्फ़ आंधरा प्रदेश के दो अज़ला ( जिलों) में साफ़ कर दिए गए। उन्होंने नक़्सलाईट्स की तलाशी मुहिम ( योजना) के लिए जंगलात का सफ़ाया एक ग़ैर वाजिबी बात है।

उन्होंने मुतालिबा (दावा करना/मांग) किया कि तमाम कबायली और मुक़ामी अफ़राद ( व्यक़्ती/आदमी) को चाहीए कि वो जंगलात की तरक़्क़ी के लिए काम करें। एक सवाल के जवाब में नटराजन ने कहा कि एन जी औज़ ( NGOs) के लिए कोई अलैहदा फंड्स अलॉट नहीं किए गए हैं। उन्हों ने कहा कि जंगलात के मद के लिए कोई इन जी औज़ ( NGOs) फंड्स नहीं दिए गए।

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