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नजीब की माँ के साथ पुलिस ने की बदसलूकी, समर्थकों के साथ किया गिरफ्तार

नई दिल्ली। नजीब के गायब होने के ठीक 1 साल बाद आज दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई की पेशी थी । मामले में कोई विशेष पहल न करने के लिए पहले तो सीबीआई को कोर्ट में जमकर फटकार लगाई जाती है, उसके बाद कोर्ट के सामने प्रोटेस्ट कर रहे छात्र-छात्राओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके तिलक नगर थाने में ले जाया जाता है।

इस दौरान दिल्ली पुलिस का भयानक चेहरा सामने आये उन्होंने नजीब की माँ को सड़क पर घसीटकर पुलिस गाड़ी में डाला इस दौरान नजीब की मां चीखने चिल्लाने लगी और कहने लगी कि मैंने कौन सी अराजकता फैलाई है मुझे जबरदस्ती क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है ? लेकिन दिल्ली पुलिस ने एक न सुनी और उनको घसीटकर जीप में डाल दिया ।

क्या था पूरा प्रकरण
उत्‍तर प्रदेश के बदायूं जिले का रहने वाला नजीब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के मावी-मांडवी हॉस्‍टल रूम नंबर 106 में रहता था। उस समय जेएनयू में हॉस्‍टल यूनियन का चुनाव चल रहा था। इसी हॉस्‍टल में मेस सचिव पद का उम्मीदवार विक्रांत यादव 14 अक्‍टूबर की रात नजीब के कमरे में प्रचार के लिए आया था।

इसी दौरान दोनों में कहासुनी हुई। उमर खालिद का कहना था कि 27 वर्षीय नजीब अहमद को विक्रांत यादव द्वारा बुलाकर लाई गई भीड़ ने पीटा था। जिसके बाद 15 तारीख की सुबह से उसका पता नहीं है। नजीब अहमद के रूममेट मोहम्‍मद कासिम थे। इस हॉस्‍टल में करीब दो सौ कमरे हैं।

एबीवीपी से जुड़े लोगों का कहना है कि इस दौरान नजीब अहमद ने विक्रांत को दो झापड़ जड़ दिए। इसके बाद विक्रांत ने छात्र संघ के कुछ पदाधिकारियों को बुला लिया। दोनों पक्षों में सुलह की कोशिश की गई। इस हॉस्‍टल के एक गार्ड ने भी बताया 14 तारीख की रात प्रचार को लेकर हंगामा हुआ था।

मामले ने राजनीतिक रंग भी लिया था जहां एक ओर पूर्व जेएनयूएसयू उपाध्यक्ष शहला रशीद ने कहा था कि कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश इसलिए दिए थे क्योंकि उसे दिल्ली पुलिस के राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किए जाने का अंदेशा था। इसके अलावा शशि थरूर, अरविंद केजरीवाल और सीताराम येचुरी जैसे नेताओं ने भी नजीब के परिवार से मिलकर उनके साथ एकजुटता दिखाई थी।

अंत में मामले की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंप दी गई थी और नजीब का पता बताने वाले को 10 लाख रुपये इनाम देने की भी घोषणा की गई थी।

उस समय नजीब की वापसी और सरकार पर दवाब बनाने के लिए देश के अलग अलग हिस्सों में छात्रों और सामाजिक संस्थाओं ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे। जिसमें छात्रों के ऊपर लाठीचार्ज, मुक़दमे भी दर्ज़ हुए थे। अब नजीब को गायब हुए एक साल होने पर लोगों ने सीबीआई मुख्यालय को घेर लिया था।

जिसके बाद आज हाई कोर्ट में मुक़दमे की सुनवाई चल रही थी जहाँ पहले अदालत ने सीबीआई को खरीखोटी सुनाई थी। उसके बाद बाहर प्रदर्शन कर रहें लोगों को हिरासत में ले लिया गया।

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