Wednesday , April 25 2018

नजीब गुमशुदगी: कोर्ट ने फोरेंसिक लैब को दिया आदेश, जल्द करें संदिग्धों के फोन की जांच

हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ की एक फोरेंसिक प्रयोगशाला को जेएनयू छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले में संदिग्ध नौ छात्रों के मोबाइल फोन की जांच का काम तेज करने का निर्देश दिया. अदालत ने जब्त फोन के फोरेंसिक विश्लेषण में देरी पर चिंता जताते हुए प्रयोगशाला को 19 मार्च तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा.

न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति आई एस मेहता की एक पीठ ने कहा कि वह सीएफएसएल, चंडीगढ़ के निदेशक को जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच की प्रक्रिया तेज करने और इसकी रिपोर्ट मामले की जांच कर रही सीबीआई को सौंपने का विशिष्ट निर्देश जारी करने को ‘‘मजबूर’’ हैं.
इससे पहले सीबीआई के वकील ने अदालत को सूचित किया कि पूर्व में बार बार रिमाइंडर भेजने के बाद जांच अधिकारी ने गत नौ फरवरी को सीएफएसएल कार्यालय का दौरा किया. सीबीआई के वकील निखिल गोयल ने कहा कि फोरेंसिक अधिकारियों ने सीबीआई अधिकारी को बताया कि नौ लोगों के मोबाइल फोन की जांच अब भी चल रही है और रिपोर्ट जल्द ही सौंप दी जाएगी.

मां फातिमा नफीस ने याचिका दायर की थी 
उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों ने जांच अधिकारी से यह भी कहा कि फोरेंसिक जांच तेज करने की उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के कई दूसरे अनुरोध भी लंबित हैं. इसपर अदालत ने इस बात का संज्ञान लिया कि अक्तूबर, 2016 में नजीब के लापता होने के बाद उसकी मां फातिमा नफीस ने यह याचिका दायर की थी और अदालत तब से उसपर सुनवाई कर रहा है तथा फातिमा की बेचैनी समझी जा सकती है.

पीठ ने कहा, ‘‘सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट, नौ लोगों के मोबाइल फोन का विश्लेषण जांच में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. ’’ सीबीआई ने अब तक उठाए गए अपने कदमों की जांच से जुड़ी एक स्थिति रिपोर्ट भी अदालत में पेश की .  अदालत ने फातिमा के वकील को उसके कुछ हिस्से पढ़ने की मंजूरी दी.

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