Thursday , December 14 2017

नफ़रतअंगेज़ तक़रीर, मर्कज़ को सुप्रीम कोर्ट की नोटिस

नई दिल्ली, 09 अप्रैल: (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने सियासतदानों के इलावा समाजी-ओ-मज़हबी तंज़ीमों के क़ाइदीन की जानिब से नफ़रतअंगेज़ तक़ारीर पर पाबंदी के लिए रहनुमा ख़ुतूत मुदव्वन करने की दरख़ास्त पर मर्कज़ से जवाब तलब किया है।

नई दिल्ली, 09 अप्रैल: (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने सियासतदानों के इलावा समाजी-ओ-मज़हबी तंज़ीमों के क़ाइदीन की जानिब से नफ़रतअंगेज़ तक़ारीर पर पाबंदी के लिए रहनुमा ख़ुतूत मुदव्वन करने की दरख़ास्त पर मर्कज़ से जवाब तलब किया है।

चीफ़ जस्टिस अल्तमिश कबीर की क़ियादत में एक बेंच ने आंधरा प्रदेश और महाराष्ट्रा हुकूमतों को नोटिस जारी की है जहां हालिया अर्सा में मुबय्यना तौर पर नफ़रत अंगेज़ तक़ारीर के वाक़ियात पेश आए थे। मफ़ाद-ए-आम्मा की दरख़ास्त में इस्तेदलाल पेश किया गया था कि नफ़रतअंगेज़ तक़ारीर में बज़ाहिर मज़हब, इलाक़ा, ज़ात पात और मुक़ाम पैदाइश को निशाना बनाया जाता है जो दस्तूर की दफ़आत के ख़िलाफ़ है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मसला पर इलेक्शन कमीशन से जवाब तलब किया है। एक ग़ैरसरकारी तंज़ीम प्रवासी भलाई संघटन ने मफ़ाद-ए-आम्मा के तहत ये दरख़ास्त दायर की थी जिस में कहा गया था कि नफ़रतअंगेज़ तक़ारीर को रोकने रहनुमा ख़ुतूत वज़ा करने की ज़रूरत है क्योंकि ऐसी तक़ारीर से जम्हूरी ताना बाना तबाह हो जाता है और दस्तूरी दफ़आत की ख़िलाफ़वर्ज़ी होती है।

मफ़ाद-ए-आम्मा की दरख़ास्त में आंधरा प्रदेश और महाराष्ट्रा को मुद्दई अलीहान बनाया गया था क्योंकि इन रियासतों में मुबय्यना तौर पर नफ़रतअंगेज़ तक़ारीर के वाक़ियात पेश आए थे। दरख़ास्त में महाराष्ट्रा नवनिर्माण सेना के सरबराह राज ठाकरे की मुबय्यना नफ़रतअंगेज़ तक़ारीर का हवाला दिया गया था और ये दावा किया गया था कि रियासत में इन के ख़िलाफ़ कोई एफ़ आई आर दर्ज नहीं किया गया है।

मफ़ाद-ए-आम्मा की इसी दरख़ास्त में कहा गया है कि आंधरा प्रदेश में मजलिस के लीडर अकबर उद्दीन ओवैसी ने मुबय्यना तौर पर नफ़रतअंगेज़ तक़रीर की थी और उन तक़ारीर के ज़िमन में उन्हें गिरफ़्तार भी किया गया था ।

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