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नफ़रतअंगेज़ ग़ैरमुल्की चैनल्स पर हुकूमत की नज़र

नई दिल्ली, 07 दिसंबर: (एजेंसी) नफ़रतअंगेज़ टी वी चैनल्स जिन्हें गै़रक़ानूनी तौर पर डाउन लिंक किया गया है और हिंद । पाक सरहदी इलाक़ों और शुमाल मशरिक़ी हिंद के सरहदी इलाक़ों में नाज़रीन की उन तक आज़ादाना रसाई है।

नई दिल्ली, 07 दिसंबर: (एजेंसी) नफ़रतअंगेज़ टी वी चैनल्स जिन्हें गै़रक़ानूनी तौर पर डाउन लिंक किया गया है और हिंद । पाक सरहदी इलाक़ों और शुमाल मशरिक़ी हिंद के सरहदी इलाक़ों में नाज़रीन की उन तक आज़ादाना रसाई है।

हिंदूस्तान के ख़िलाफ़ नफ़सियाती जंग में अहम हथियार बन चुके हैं। इंटेलीजेंस ब्यूरो (आई बी) ने उसे 24 गै़रक़ानूनी ग़ैरमुल्की चैनल्स की निशानदेही की है, जिन पर हिंदूस्तान मुख़ालिफ़ प्रोग्राम पेश करने का इल्ज़ाम है। इमकान है कि इन चैनल्स की ये शरारत इतनी संगीन है कि हुकूमत ने पार्लीमेंट में इसका तज़किरा करते हुए कहा कि इन चैनल्स में से बाअज़ पर दिखाए जाने वाले प्रोग्राम मुल्क के शांती माहौल के लिए साज़गार नहीं है और उन से मुल्क की सयानत को शदीद ख़तरा लाहक़ होता है।

हुकूमत ने ऐसे चैनल्स के ख़िलाफ़ फ़ौजदारी दफ़आत को ज़्यादा मुस्तहकम बनाने की तजवीज़ पेश की है और चाहती है कि केबल टी वी क़ानून में तरमीमात की जाएं और इसमें जुर्मानों की रक़म में इज़ाफ़ा किया जाए। इलावा अज़ीं सज़ा ए क़ैद की मौजूदा दफ़आत में तरमीम करके क़ैद की मुद्दत में भी इज़ाफ़ा किया जाए।

हुकूमत का ये इक़दाम कि इन चैनल्स को बलॉक कर दिया जाए क्योंकि उनकी वजह से उत्तर प्रदेश, हैदराबाद, आसाम, श्रीनगर, मुंबई और हिंदूस्तान के दीगर इलाक़ों में हालिया महीनों में फ़िर्कावाराना तशद्दुद के वाक़ियात पेश आ चुके हैं, नाकाम हो चुकी है क्योंकि ओहदेदारों को तमाम चैनल्स रोक देने में मुश्किल पेश आ रही है।

उन पर उनके कंट्रोल के फ़ुक़दान ( कमी) से उन चैनल्स के हौसले बुलंद हो गए हैं और सरहदी इलाक़ों के इलावा दीगर इलाक़ों में ये चैनल्स आज़ादाना तौर पर हिंद मुख़ालिफ़ प्रोग्राम पेश कर रहे हैं। इन चैनल्स में पाकिस्तान का कैविटी वे, मदनी टी वी, ए आर वाई टी वी, पी टी वी, जी टी वी, डॉन, एक्सप्रेस, वक़्त, नूर, हादी, आज, फिल्मकस, एसटीवी, मुत्तहदा अरब अमीरात का पीस टी वी, सऊदी टी वी, मालदीप का टी वी, बंगला देश का एन टी वी, नेपाल टी वी, नेपाल का कान्ती पर टी वी, बर्तानिया का अहमदिया चैनल और भूटान की ब्रॉडकास्टिंग सर्विस शामिल हैं।

फ़िलहाल मौजूदा दफ़आत के तहत पहले इर्तिकाब-ए-जुर्म पर 2 साल सज़ा ए क़ैद या 2 लाख रुपय जुर्माना या दोनों किए जा सकते हैं। दूसरे इर्तिकाब पर 5 साल सज़ा ए क़ैद या 3 लाख रुपय जुर्माना या दोनों किए जा सकते हैं।

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