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नरेंद्र मोदी अब फ़िर्कापरस्त नहीं रहे ?

अहमदाबाद, 12 दिसंबर: (पीटीआई )गुजरात फ़सादाद के 10 साल बाद जिसने गुजरात के राय दहनदों को फ़िर्कावाराना ख़ुतूत पर तक़सीम कर दिया था, चीफ़ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी मुसलसल तीसरी मीआद के लिए चुनावी मैदान में हैं, लेकिन इस बार अपनी रिवायती हरीफ़ क

अहमदाबाद, 12 दिसंबर: (पीटीआई )गुजरात फ़सादाद के 10 साल बाद जिसने गुजरात के राय दहनदों को फ़िर्कावाराना ख़ुतूत पर तक़सीम कर दिया था, चीफ़ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी मुसलसल तीसरी मीआद के लिए चुनावी मैदान में हैं, लेकिन इस बार अपनी रिवायती हरीफ़ कांग्रेस और बी जे पी के बाग़ी ताक़तवर उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ इनका इंतिख़ाबी ( चुनावी) मौज़ू फ़िर्कापरस्ती नहीं बल्कि तरक़्क़ी है ।

गुजरात में 2012 के इंतिख़ाबात जिसे माज़ी के दो इंतिख़ाबात के दौरान हिंदूतुत्वा सियासत की तजुर्बागाह क़रार दिया गया था ,इस बार नरेंद्र मोदी की शबिया को उनकी हक़ीक़त से कहीं ज़्यादा मुबालग़ा आराई के साथ पेश किया जा रहा है ।

नरेंद्र मोदी गुजरात में सबसे ज़्यादा मुद्दत तक बहैसीयत चीफ़ मिनिस्टर बरक़रार रहने वाले शख़्स हैं और उनका 2002 से रियास्ती सयासी मंज़र नामा पर ग़लबा बरक़रार है, जबकि 2002 के फ़िर्कावाराना फ़सादाद में 1000 से ज़्यादा ज़िंदगीयां जिन में अक्सरीयत मुसलमानों की हैं ज़ाये हो चुकी हैं, जिसकी वजह से नरेंद्र मोदी दुनिया भर में बदनाम हो गए, लेकिन उनको घेरे हुए ग्रुप में उनकी एक शख़्सी शबिह‌ बन गई है

ताहम इस बार जज़बाती फ़िर्कापरस्ती का मसला मुकम्मल तौर पर ग़ायब है । गुजरात परिवर्तन पार्टी के केशव भाई पटेल की जानिब से क़ियाम के बाद और हुकूमत मुख़ालिफ़ अंसर की बिना पर नरेंद्र मोदी की दुबारा बरसर‍ ए‍ इक्तेदार आने की कोशिशों में अदीमुल्मिसाल रुकावट पैदा हो गई है ।

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