Tuesday , December 12 2017

नरोदा पाटिया दंगों की सुनवाई से जुड़े तीसरे जज ने भी किया खुद को अलग

गुजरात: नरोदा पाटिया दंगा से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई कर रहे गुजरात उच्च न्यायालय के एक और न्यायाधीश ने खुद को मामले से अलग कर लिया। ऐसा करने वाले वे तीसरे न्यायाधीश हैं।

जब याचिकाएं सुनवाई के लिए पीठ के सामने लायी गयीं तो न्यायमूर्ति अकील कुरैशी शामिल ने कहा कि मेरे सामने न लाएं। गुजरात की पूर्व मंत्री मायाबेन कोडनानी और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व नेता बाबू बजरंगी ने विशेष निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति के एस झावेरी ने भी पिछले साल इन याचिकाओं पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय की तरफ से गठित विशेष जांच दल एसआईटी और दंगे में बचे लोगों दोषी लोगों की सजा बढ़ाने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर डाली हैं।

साल 2002 में गुजरात के गोधरा में ट्रेन जलाने की घटना हुई थी। उसके एक दिन बाद नरोदा पाटिया में भारी दंगे हुए थे। इसमें तकरीबन 97 लोग मारे गए थे। मृतकों में अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग थे। अगस्त, 2012 में निचली अदालत ने 31 लोगों को दोषी करार दिया था। माया कोटनानी समेत 30 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और बाबु बजरंगी को मौत होने तक उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

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