नसीब नगर चंदरायन गट्टा के नसीब कब जागेंगे ?

नसीब नगर चंदरायन गट्टा के नसीब कब जागेंगे ?
हैदराबाद ०८। सितंबर : पुराना शहर हैदराबाद को सारी दुनिया में इस के तहज़ीब-ओ-तमद्दुन दक्कनी रवायात ग़ैरमामूली और फ़न तामीर की शाहकार तारीख़ी इमारतों बिशमोल चारमीनार , ख़ूबसूरत महलात , वसीअ-ओ-अरीज़ बाग़ों माहिराना अंदाज़ में बनाई

हैदराबाद ०८। सितंबर : पुराना शहर हैदराबाद को सारी दुनिया में इस के तहज़ीब-ओ-तमद्दुन दक्कनी रवायात ग़ैरमामूली और फ़न तामीर की शाहकार तारीख़ी इमारतों बिशमोल चारमीनार , ख़ूबसूरत महलात , वसीअ-ओ-अरीज़ बाग़ों माहिराना अंदाज़ में बनाई गई बावलियों और यहां के मुस्लमानों के जज़बा उखुवत की हैसियत से जाना जाता है लेकिन सरकारी ओहदेदारों के तास्सुब हुकूमत की मुजरिमाना ग़फ़लत-ओ-तसाहली और अपनों की बे अमली ने इस शहर से तारीख़ी महलात वसीअ-ओ-अरीज़ बाग़ों और फ़न तामीर कीशाहकार बावलियों से महरूम कर दिया है हद तो ये है कि इस शहर में मौजूद अहम सरकारी दफ़ातिर हॉस्पिटलों (डिसपेंसरीयों ) को तक मुंतक़िल करदिया गया ये ऐसे ही नहीं किया गया बल्कि एक साज़िश-ओ-मंसूबा के तहत पुराना शहर को नज़रअंदाज किया गया ।

हैरत की बात ये है कि हर चीफ़ मिनिस्टर ने अपनी मीयाद के दौरान पुराना शहर का दौरा ज़रूर किया और वादों की बारिश करदी लेकिन ये वाअदे सिर्फ़ वाअदे रह गए । चीफ़ मिनिस्टर मिस्टर एन किरण कुमार रेड्डी ने 5 जून 2011 को शहर के कम अज़ कम 4 मुक़ामात परमुख़्तलिफ़ तरक़्क़ीयाती पराजकटस के संग-ए-बुनियाद रखे थे और इस बात का ऐलान किया था कि इन पराजकटस की अंदरून साल तकमील की जाएगी लेकिन अफ़सोस के एक साल गुज़र जाने के बावजूद अब तक इन मुक़ामात पर किसी भी तामीरी काम का आग़ाज़तक ना होसका बल्कि संग-ए-बुनियाद की तख्तियां चीफ़ मिनिस्टर मिस्टर एन कुमार रेड्डी के वाअदा और अवामी नुमाइंदों के खोखले दावो का मज़ाक़ उड़ा रही हैं ।

इन चार अहम पराजकटस में नसीब नगर चंदरायन गट्टा में इन ए सी ( नैशनल एकेडेमी आफ़ कंस्ट्रक्शन ) की तामीर भी शामिल थी । चीफ़ मिनिस्टर मिस्टर एन किरण कुमार रेड्डी ने 5 जून 2011 को नसीब नगर में नैशनल एकेडेमी आफ़ कंस्ट्रक्शन की तामीर का संग-ए-बुनियाद रखा था । इस मौक़ा पर इन का मुक़ामी अफ़राद ने ये सोच कर वालहाना इस्तिक़बाल किया था कि चलो पुराना शहर के इस इलाक़ा में एक बड़ा काम होने जा रहा है और इस सेबेरोज़गार नौजवानों को रोज़गार हासिल होगा । ख़ुद चीफ़ मिनिस्टर ने तक़रीब संग-ए-बुनियाद रखने के बाद अपनी तक़रीर में बार बार यही कहा था कि पुराना शहर की तरक़्क़ीअब मिसाली रहेगी ।

इस सिलसिला में उन्हों ने पुराना शहर की बस्तीयों का जुबली हिलज़ तक तक़ाबुल करने की हमाक़त तक कर डाली थी और कहा था कि जुबली हिलज़ कीतरक़्क़ी तरक़्क़ी नहीं बल्कि पुराना शहर की तरक़्क़ी को हक़ीक़त में तरक़्क़ी कहा जाएगा । उन्हों ने ये भी कहा था कि नैशनल एकेडेमी आफ़ कंस्ट्रक्शन की इमारत की तामीर और इस के क़ियाम से इलाक़ा के बेरोज़गार नौजवानों को रोज़गार हासिल होगा । उन्हेंमुख़्तलिफ़ फ़नून की तर्बीयत दी जाएगी जिस के बाद नौजवानों को बह आसानी मुलाज़मतें-ओ-रोज़गार हासिल होंगे लेकिन चीफ़ मिनिस्टर के वाअदे वफ़ा ना होसके वो इसी तरह बिखर गए जिस तरह चीफ़ मिनिस्टर की तक़रीर उन के अलफ़ाज़ और वाअदे हवाओ की लहरों में बिखर गए थे ।

नसीब नगर में इन ए सी इमारत के संग-ए-बुनियाद की क़ीमतीतख़्ती आज भी मौजूद है । राक़िम उल-हरूफ़ ने देखा कि वहां सिर्फ हिसारबंदी की गई है जब कि मुक़ामी अफ़राद का कहना है कि इस क़ीमती तख़्ती की क़ीमत के बराबर भीतामीरी काम ना होसका । इलाक़ा की एक बुज़ुर्ग शख़्सियत सय्यद अहमद ने बताया किअवाम बहुत ख़ुश हुए थे कि चीफ़ मिनिस्टर ने बह नफ़स नफ़ीस यहां आकर इमारत का संग-ए-बुनियाद रखा था और वाअदा किया था कि इन ए सी मुक़ामी नौजवानों के लिए एक नेअमत साबित होगी लेकिन असल ख़ुशी तो तब होती जब उन के वाअदे पूरे होते । हैरत तो इस बात पर होती है कि संग-ए-बुनियाद रखने के बाद किसी ने इस तरफ़ पलट कर भी नहीं देखा ।”

पता नहीं नसीब नगर के नसीब कब जागेंगे । एक और मुक़ामी शख़्स ने कहा कि नैशनल एकेडेमी आफ़ कंस्ट्रक्शन की तामीर के साथ साथ यहां सड़कें बिछाने की भीशदीद ज़रूरत है । सड़कें इंतिहाई बुरी हालत में हैं अगर इन सड़कों को देखा तो तरक़्क़ी-ओ-ख़ुशहाली के तमाम दावे खोखले नज़र आयेंगे । हम ने देखा कि नैशनल एकेडेमी आफ़कंस्ट्रक्शन की इमारत के तामीरी संग-ए-बुनियाद की 8 फुट की तख़्ती एक मुक़ाम पर लगी हुई है । इत्तिफ़ाक़ से वहां मौजूद एक कंट्टर एक्टर ने काम में ताख़ीर की वजह बताते हुए कहा कि कंट्टर एक्टर्स काम इस लिए शुरू नहीं कृपा रहे हैं क्यों कि हुकूमत फ़ंडज़ जारी नहीं कर रही है ।

आप को बतादें कि रचा बंडा प्रोग्राम के तहत चीफ़ मिनिस्टर ने 2011 में पुराना शहर का तूफ़ानी दौरा किया था । इस दौरान उन्हों ने बारकस में ई लाइब्रेरी , मोती गली में मल्टी लेवल पार्किंग और शिफ़ा ख़ाना चारमीनार की तज़ईन नौ के काम के संग-ए-बुनियाद रखे थे और कहा था कि अब पुराना शहर की क़िस्मत जाग उठी है । उन्हों ने ये भी कहा था कि सौ दिन के दौरान शहर की तरक़्क़ी के लिए दो हज़ार करोड़ रुपय ख़र्च किए जाऐंगे लेकिन चीफ़ मिनिस्टर का कोई वाअदा वफ़ा ना होसका । इन तमाम मुक़ामातपर तामीरी काम शुरू ही नहीं हुए जब कि कामों की तकमील के लिए एक साल की मुद्दत मुक़र्रर की गई थी । अवाम का कहना है कि हुकूमत और ओहदादार जान बूझ कर पुराना शहर को नज़रअंदाज करते हैं और उन्हें पता है कि इन की लापरवाही ग़फ़लत-ओ-तास्सुब को रोकने वाला यहां कोई नहीं है ।

हुकूमत और ओहदादार ये अच्छी तरह जानते हैं कि पुराना शहर से सरकारी दफ़ातिर बर्ख़ास्त करलीं या डिसपेंसरीयां उठादें इबतदा-ए-में थोड़ी बहुत आवाज़ें उठती हैं और देखते ही देखते ख़ामोशी छा जाती है और कोई भी मसलाक़िस्सा पारीना बन जाता है । अवाम के इसरार के बावजूद किसी में इस बात की जुरात तक पैदा ना होसकी कि पासपोर्ट का इलाक़ाई दफ़्तर पुराना शहर में भी क़ायम करवाए हालाँकि यहां के हज़ारों नौजवान बैरून-ए-मुल्क मुलाज़मत करते हैं दूसरी जानिब तरक़्क़ीयाती पराजकट पर हज़ारों करोड़ रुपय ख़र्च करने के वाअदा किए जाते हैं जब कि तल्ख़ हक़ीक़त ये है कि हिंदूस्तान की बदतरीन सड़कें आप को हैदराबाद में नज़र आयेंगी । पुराना शहर में तो तरक़्क़ी के नाम पर सड़कों की बार बार खुदाई की जा रही है अगर अच्छी सड़क मौजूद भी हो तो इस को खोदा जा रहा है । पूछने पर कहा जाता है कि नई सड़क डाली जा रही है । ऐसा लग रहा है कि पुराना शहर में सिर्फ सड़कों को खोदने और फिर उन की तामीर के काम ही होरहे हैं ।

अवाम अब पूछने लगी है कि चीफ़ मिनिस्टर अपने वाअदा कब पूरे करेंगे । वैसे भी अब किरण कुमार रेड्डी का दौरा पुराना शहर नामुमकिन ही लगता है । इस लिए कि वो पुराना शहर का दौरा किस मुंह से करेंगे ।अवाम उन से उन कामों के बारे में दरयाफ़त ज़रूर करेगी जिस के संग-ए-बुनियाद रखे एक साल हो चुका है लेकिन तामीरी काम शुरू ही ना हो सका ।।

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