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नामुनासिब तक़रीर, हाईकोर्ट जज का तास्सुर

हैदराबाद। 10 जनवरी: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मजलिस के फ़्लोर लीडर अकबर उद्दीन उवैसी की दायर करदा दरख़ास्त को समाअत के लिए क़बूल करलिया जिस में पुलिस को मुबय्यना नफ़रतअंगेज़ तक़रीर पर मज़ीद एफ़ आई आर दर्ज ना करने की हिदायत देने की ख़ाहि

हैदराबाद। 10 जनवरी: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मजलिस के फ़्लोर लीडर अकबर उद्दीन उवैसी की दायर करदा दरख़ास्त को समाअत के लिए क़बूल करलिया जिस में पुलिस को मुबय्यना नफ़रतअंगेज़ तक़रीर पर मज़ीद एफ़ आई आर दर्ज ना करने की हिदायत देने की ख़ाहिश की गई थी।

जस्टिस एल नरसिम्हा रेड्डी ने अकबर उवैसी की दरख़ास्त को क़बूल करते हुए उन की नफ़रतअंगेज़ तक़रीर पर नाराज़गी ज़ाहिर की और कहा कि ये अच्छी अलामत नहीं है।

जज ने वाज़िह तौर पर कहा कि अदालत अवाम को इस तरह की तक़रीर के ख़िलाफ़ शिकायात से नहीं रोक सकती। ये उन का हक़ है कि शिकायत दर्ज कराईं चुनांचे अदालत इस मरहला पर उबूरी अहकाम जारी नहीं करेगी।

तमाम एफ़ आई आर को यकजा करने या पुलिस को मज़ीद एफ़ आई आर दर्ज ना करने की हिदायत के बारे में बाद में ग़ौर किया जाएगा। जज ने कहा कि एक अवामी नुमाइंदा होने की बिना जल्सा-ए-आम में इस तरह के तबसरे मुंसिफ़ाना नहीं होसकते।

इस मुल्क के अवाम ने उन के वालिद और भाई को रुकन पार्लीमैंट मुंतख़ब क्या, उन के वालिद ने हिंदू तबक़ा के दो अफ़राद को शहर के मेयर के ओहदा पर नामज़द किया था लेकिन अब उन्ही के फ़र्ज़ंद मुल्क की तौहीन कररहे हैं।

जज ने अकबर उद्दीन उवैसी पर हमला का ज़िक्र करते हुए कहा कि तमाम तबक़ात ने उन की सेहतयाबी के लिए दुआएं की थीं। जस्टिस एल नरसिम्हा रेड्डी ने अकबर उद्दीन उवैसी के वालिद को सैकूलर अज़म की मिसाल क़रार दिया और कहा कि हमें उन के फ़र्ज़ंद से इस तरह की तक़रीर की उम्मीद नहीं थी।

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