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नावी मुंबई के स्कूल को छटवें पे कमीशन के मुताबिक़ तनख़्वाहें अदा करने की हिदायत

बाम्बे हाइकोर्ट ने नावी मुंबई के करोल में वाक़्य ( मौजूद) सेंट जेवेर्स हाई स्कूल के टीचर्स और इंतिज़ामीया को हिदायत की है कि वो तनख़्वाहों की अदायगी पर पैदा शूदा तनाज़ा ( झगड़ा) की यकसूई ( खातमा/ हल) बाहमी बातचीत के ज़रीया करें।

बाम्बे हाइकोर्ट ने नावी मुंबई के करोल में वाक़्य ( मौजूद) सेंट जेवेर्स हाई स्कूल के टीचर्स और इंतिज़ामीया को हिदायत की है कि वो तनख़्वाहों की अदायगी पर पैदा शूदा तनाज़ा ( झगड़ा) की यकसूई ( खातमा/ हल) बाहमी बातचीत के ज़रीया करें।

छटवें पे कमीशन की सिफ़ारिशात के मुताबिक़ तनख़्वाहों की अदायगी होनी चाहीए। चीफ़ जस्टिस मोहित शाह और जस्टिस नितिन जामदार की क़ियादत में एक बंच ने स्कूल इंतिज़ामीया को ये हिदायत भी की है कि वो जून के अवाख़िर तक टीचर्स और प्रिंसिपल की असल तनख़्वाह और उन्हें अदा की गई तनख़्वाह की रक़ूमात का मुकम्मल गोशवारा ( हिसाब किताब का पूरा ब्योरा) अदालत में दाख़िल करे।

याद रहे कि टीचर्स और प्रिंसिपल की जानिब से दाख़िल कर्दा मुतअद्दिद दरख़ास्तों ( बहुत से आवेदन) की 14 जून को समाअत ( सुनवाई) के बाद अदालत ने ये फ़ैसला सुनाया। टीचर्स और प्रिंसिपल की शिकायत थी कि उन्हें छटवें पे कमीशन की सिफ़ारिशात के मुताबिक़ तनख़्वाहें अदा नहीं की जा रही हैं। जजस ( न्यायधीश) ने अपने फ़ैसला में ये भी हिदायत की है कि जहां तक टीचर्स और प्रिंसिपल की तनख़्वाहों और एलाउंस के बक़ायाजात का सवाल है तो उसे छटवें पे कमीशन की सिफ़ारिशात के मुताबिक़ जून 2011 से 31 मार्च 2012 -ए-अंदरून दो हफ़्ता अदा किया जाये और इसका एक मुकम्मल गोशवारा भी तैयार करके स्कूल के नोटिस बोर्ड पर चस्पाँ ( चिपका दिया) किया जाय और इसकी एक नक़ल अदालत में दाख़िल की जाये।

जजस ( न्यायधीश) ने स्कूल इंतिज़ामीया वजह नुमाई करने की हिदायत करते हुए कहाकि आख़िर उसे छटवें पे कमीशन की सिफ़ारिशात के मुताबिक़ तनख़्वाहों और एलाउंस के बक़ायाजात अदा करने की हिदायत क्यों ना की जाये। यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी है कि दिसम्बर 2011 में मज़कूरा( उक़्त) स्कूल के टीचर्स ने इंतिज़ामीया की जानिब से छटवें पे कमीशन की सिफ़ारिशात के मुताबिक़ तनख़्वाहों की अद मे अदायगी के ख़िलाफ़ एक हफ़्ता तक हड़ताल भी की थी।

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