Saturday , December 16 2017

ना मुसाइद हालात में भी उर्दू का पर्चम बुलंद

बज़म उर्दू, करनूल का माहाना मुशायरा डाक्टर हक़ स्कूल करनूल के हाल में जनाब अज़मत अली अज़मत की ज़ेर-ए-सदारत मुनाक़िद हुआ।मुशायरा का आग़ाज़ आईशा बानो मुअल्लिमा सहारा ट्यूटोरियल की पर असर क़रा॔त कलाम पाक से हुआ ।

बज़म उर्दू, करनूल का माहाना मुशायरा डाक्टर हक़ स्कूल करनूल के हाल में जनाब अज़मत अली अज़मत की ज़ेर-ए-सदारत मुनाक़िद हुआ।मुशायरा का आग़ाज़ आईशा बानो मुअल्लिमा सहारा ट्यूटोरियल की पर असर क़रा॔त कलाम पाक से हुआ ।

नात-ए-शरीफ़ इमरान बाशा तालिब-ए-इल्म सहारा ट्यूटोरियल कुरनूल ने पेश की। डाक्टर कैसी क़मर नगरी, मोतमिद, बज़म उर्दू, ने सामईन और शारा इकराम का ख़ौरमक़दम करते हुए कहा कि अलहम्दुलिल्लाह गुज़शता 15 महीनों में बज़्म उर्दू के ज़ेर-ए-एहतिमाम ये 23 वां मुशायरा मुनाक़िद हो रहा है।

नए शारा-ए-इकराम की हिम्मत अफ़्ज़ाई की कामयाब कोशिश में बज़्म उर्दू ने ताहाल 27 शोरा-ओ- शाअरात को इस डाइस से मुतआरिफ़ करवाने में कामयाबी हासिल की है । जिसके लिए बज़्म उर्दू को मुबारकबाद दी जानी चाहीए। इलावा अज़ीं ननदयाल में भी हर माह तीसरे हफ़्ता को नैशनल डिग्री कालेज के अहाता में उर्दू शायरी की तर्बीयती जमातें मुनज़्ज़म की गई हैं जिसमें दो सौ से ज़ाइद फिदयान शेअर-ओ-सुख़न हिस्सा ले रहे हैं।

बज़्म उर्दू की यही कोशिश है कि किसी ना किसी तरह अवाम में ज़्यादा से ज़्यादा नए लिखने वाले मंज़र-ए-आम पर आएं।इस ज़िमन में बज़म ने कितनी कामयाबी हासिल की इसका नतीजा आप माहनामा बज़्म-ए-आईना के सफ़हात पर देख सकते हैं ।

जिसमें हर माह नए लिखने वालों का इज़ाफ़ा हो रहा है। मिस्रे तरह नज़र से नज़र मिलाते चलो, पर सइदुर्रहमान्, साद, शमशाद बेगम शाद, अबदुल जलील अरम अज़मत अली अज़मत , नसीम उन्निसा, सबा, अमतुल-अज़ीज़ अज़ीज़ा के इलावा बैरूनी शारा-ए-इकराम का मुर्सला कलाम सहारा ट्रैवल्स के तलबा-ओ- तालिबात ने पेश किया ।

निज़ामत के फ़राइज़ सादुर्रहमान साद ने बहसन-ओ-ख़ूबी अंजाम दिए।बिलआख़िर ख़ुत्बा-ए-सदारत में अज़मत अली अज़मत कड़पवी ने कहा कि बज़म उर्दू इन ना मसाइद हालात में भी उर्दू का पर्चम उठाए उर्दू ज़बान अदब और तालीम के मैदान में तेज़ गामी से आगे बढ़ रही है इस सिलसिले में तमाम महबान उर्दू, और मख़लसीन के तआवुन की ज़रूरत है।

सदर बज़म उर्दू ने तमाम उर्दू वालों से अपील की कि नवाब अलिफ़ ख़ान मैमोरियल उर्दू रिसर्च सेंटर के लिए अपनी अपनी किताबों का अतीया दें ताकि इस मर्कज़ तहक़ीक़ को रायलसीमा का मुमताज़ तरीन दारुन मुतायला होने का आज़ाज़ हासिल हो ।

उन्होंने ये भी ऐलान किया कि मार्च की 11तारीख़ को बज़म उर्दू की जानिब से नाअतिया मुशायरे का इनइक़ाद अमल लाया जाएगा।

TOPPOPULARRECENT