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निशाने पर मरांडी, पुख्ता नहीं सिक्यूरिटी

रांची 6 जून : नक्सलियों की हिटलिस्ट में शामिल रियासत के साबिक़ वज़ीरे आला और एमपी बाबूलाल मरांडी की सिक्यूरिटी इन्तेज़ामात पुख्ता नहीं है। उनकी सिक्यूरिटी में हुकूमत सुस्ती बरत रही है। पहले डीएसपी (एसडीपीओ) सतह के अफसर को मिस्टर

रांची 6 जून : नक्सलियों की हिटलिस्ट में शामिल रियासत के साबिक़ वज़ीरे आला और एमपी बाबूलाल मरांडी की सिक्यूरिटी इन्तेज़ामात पुख्ता नहीं है। उनकी सिक्यूरिटी में हुकूमत सुस्ती बरत रही है। पहले डीएसपी (एसडीपीओ) सतह के अफसर को मिस्टर मरांडी की सिक्यूरिटी की जिम्मेवारी दी गयी थी।

इसके बाद इंस्पेक्टर को जिम्मेवारी दी गयी। अब सब-इंस्पेक्टर सतह के अफसर मिस्टर मरांडी की सिक्यूरिटी इन्तेजामात संभाल रहे हैं। बाबूलाल मरांडी को जेड-प्लस की सिक्यूरिटी मिली है, लेकिन इस मयार पर सिक्यूरिटी के मौसर अक्दमात नहीं हैं।

गिरिडीह के तिसरी प्रखंड में कोदाइबांक के पुस्तैनी मकान से लेकर रांची के अरगोड़ा में बाबूलाल मरांडी के रिहायसीगाह में सिक्यूरिटी के काफी अक्दमात नहीं किये गये हैं। नक्सल मुतासिर कोदाइबांक में एक हवलदार और तीन सिपाही के जिम्मे घर की सिक्यूरिटी है, तो अरगोड़ा में जाती रिहायिसगाह पर एक हवलदार और छह सिपाही सिक्यूरिटी दे रहे हैं।

मरांडी के पास नहीं है सरकारी रिहायिसगाह

बाबूलाल मरांडी सरकारी मकान में नहीं रहते हैं, जबकि दीगर तमाम साबिक़ वज़ीरे आला सरकारी रिहायिसगाह में ही रहते हैं, जो पूरी तरह सिक्योर है। अरगोड़ा का जाती मकान सिक्योर नहीं है। सड़क के किनारे वाक़ेय मकान में चहारदीवारी नहीं है। कोई भी आसानी से घुस सकता है।

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