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निसाबी कुतुब (कोर्स बुक)मुक़र्ररा वक़्त पर तक़सीम नहीं होसके

रियासत में नया तालीमी साल 12 जून से शुरू हो रहा है। सरकारी स्कूल्स में बुनियादी सहूलतों की कमी है। दर्सी कुतुब (कोर्स बुक)अदम दस्तयाब हैं और तलबा के लिए यूनीफार्मस की भी क़िल्लत है।

रियासत में नया तालीमी साल 12 जून से शुरू हो रहा है। सरकारी स्कूल्स में बुनियादी सहूलतों की कमी है। दर्सी कुतुब (कोर्स बुक)अदम दस्तयाब हैं और तलबा के लिए यूनीफार्मस की भी क़िल्लत है।

अगरचे हुकूमत ने दावा किया है कि पीने के पानी की फ़राहमी और टायलट्स की सहूलत बेहतर बनाई गई है और स्कूली इमारतों की आहक पाशी की गई है। लेकिन रियासत भर में 80 हज़ार सरकारी स्कूल्स में पच्चास फ़ीसद स्कूल्स तमाम सहूलतों की कमी से दो-चार हैं और उन्हें बिलकुल्लिया नजर अंदाज़ किया गया है।

हक़ तालीम क़ानून के तहत इस बात का लज़ूम(पाबनदी) है कि हर स्कूल में तमाम बुनियादी सहूलतें दस्तयाब होँ और तमाम तलबा को तालीम की तमाम सहूलतें मयस्सर होँ।

सरकारी आदाद-ओ-शुमार के मुताबिक़ पच्चास हज़ार स्कूल्स में बर्क़ी कनैक्शन नहीं हैं और 40 हज़ार स्कूल्स में तालिबात के लिए अलैहदा टायलट्स नहीं हैं। स्पीकर असेंबली एन मनोहर ने हाल में निशानदेही की है कि स्कूल्स में बुनियादी सहूलतें नहीं हैं।

उन्हों ने अरकान असेंबली पर ज़ोर दिया कि वो अपने अपने हलक़ों में स्कूल्स में बुनियादी सहूलतों की फ़राहमी को यक़ीनी बनाईं। महिकमा तालीमात ने मुक़र्ररा वक़्त में निसाबी कुतुब तैय्यार नहीं कीं और मुक़र्ररा वक़्त पर दर्सी कुतुब (कोर्स बुक)की तक़सीम नहीं हुई है।

वज़ीर इबतिदाई तालीम शैलीजा नाथ ने कहा था कि तमाम स्कूल्स को 31 मई तक दर्सी कुतुब (कोर्स बुक)फ़राहम करदी जाएंगी लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका।

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