निस्फ़ आबादी बैत उल-खला की सहूलत से महरूम लेकिन मोबाईल मौजूद

निस्फ़ आबादी बैत उल-खला की सहूलत से महरूम लेकिन मोबाईल मौजूद
मुल़्क की निस्फ़ आबादी आज भी हवाइज ज़रुरीया के लिए बैत उल खला की सहूलत से महरूम है लेकिन उनके पास मोबाईल फ़ोन की सहूलत दस्तयाब है। 2011 की मर्दुमशुमारी में ये इन्किशाफ़ हुआ। घरेलू सहूलयात के बारे में तफ़सीलात इकट्ठा करने के बाद ये पता चल

मुल़्क की निस्फ़ आबादी आज भी हवाइज ज़रुरीया के लिए बैत उल खला की सहूलत से महरूम है लेकिन उनके पास मोबाईल फ़ोन की सहूलत दस्तयाब है। 2011 की मर्दुमशुमारी में ये इन्किशाफ़ हुआ। घरेलू सहूलयात के बारे में तफ़सीलात इकट्ठा करने के बाद ये पता चला कि 49.8 फीसद हिंदूस्तानी घरानों में आज भी हवाइज ज़रुरीया के लिए खुले मुक़ामात का रुख किया जाता है ।

मर्कज़ी मोतमिद दाख़िला आर के सिंह ने ये आदाद-ओ-शुमार जारी किए और बताया कि 63.2 फीसद घरानों में टेलीफोन कनेक्शन, 53.2 फीसद के पास मोबाईल फ़ोन है। इन आदाद-ओ-शुमार की रोशनी में मर्कज़ी वज़ीर देही तर कुयात जय राम रमेश का हालिया मुतनाज़ा रीमार्क दरुस्त लग रहा है जिसमें उन्होंने बताया कि ख्वातीन बैत उल-खला का नहीं बल्कि मोबाईल फोन्स का तक़ाज़ा कर रही हैं।

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