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निज़ामिया हॉस्पिटल की तज़ईन नौ में बदउनवानी ?

निज़ामिया जनरल हॉस्पिटल की ख़सताहाली के हवाले से बरसों नुमाइंदगी के बाद तकरीबन तीन साल क़ब्ल साबिक़ चीफ मिनिस्टर किरण कुमार रेड्डी ने मज़कूरा दवाखाने की तज़ईन नौ के लिए जब दरकार फंड्स जारी करने का ऎलान किया था तो ये उम्मीद पैदा होग

निज़ामिया जनरल हॉस्पिटल की ख़सताहाली के हवाले से बरसों नुमाइंदगी के बाद तकरीबन तीन साल क़ब्ल साबिक़ चीफ मिनिस्टर किरण कुमार रेड्डी ने मज़कूरा दवाखाने की तज़ईन नौ के लिए जब दरकार फंड्स जारी करने का ऎलान किया था तो ये उम्मीद पैदा होगई थी कि निस्फ़ सदी से ज़ाइद क़दीम इस दवाखाने की ना सिर्फ़ शक्ल वशबाहत पर एक बार फिर रौनक बहाल हो जाऐगी बल्कि तिब्ब यूनानी के हवाले से हुकूमती सतह पर पाए जाने वाले मुआनिदाना रवैय्या और सौतेले पन में भी ख़ुशगवार तबदीली आ जाएगी..मगर दो साल से ज़ाइद अर्सा गुज़र जाने के बाद भी उम्मीदों की ये किरण हक़ीक़त का रूप इख़तेयार ना करसकी।

अगरचे चीफ मिनिस्टर ने अपने वाअदे के मुताबिक़ इस दवाखाने की तज़ईन नौ के लिए चार करोड़ रुपय (.20करोड़) के फंड्स को मंज़ूरी भी दीदी जिसमें से तकरीबन 3करोड़ रुपये आंधर ए प्रदेश हेल्थ एंड मैडीकल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेव्लप्मेंट कारपोरेशन (ए पी एच एम आई डी सी)के हवाले किए गए थे जबकि मज़ीद 1.20करोड़ रुपये मंज़ूर किया जाना बाक़ी था।

मगर फंड्स जारी करदिए जाने के बावजूद तज़ईन नोके कामों के आग़ाज़ में एक साल का अर्सा गुज़र गया और फिर 24 जनवरी 2012 से तज़ईन नोके कामों का आग़ाज़ हुआ,ज़राए के मुताबिक़ तज़ईन नौ केलिए शयुत्रा नामी कंपनी को कंट्टरएक्ट दे दिया गया । मुआहिदे के मुताबिक़, इस दवाखाने की तज़ईन नोक़ी तकमील अप्रैल 2014तक करदेना है।

अब जबकि मुआहिदे के मुताबिक़ सिर्फ़ चंद हफ़्ते बाक़ी हैं ,अभी तक निस्फ़ काम भी मुकम्मल नहीं हो पाया है। बा वसूक़ ज़राए का कहना है कि इस क़दर तवील अर्सा गुज़र जाने के बावजूद काम की अदम तकमील की अहम वजहा मुताल्लिक़ा कंट्टरक्टर को बिबल की अदम अदाइगी है,चूँकि कंट्टरएक्टर का कहना है कि ताहाल इस ने तकरीबन 80 लाख रुपये का काम अंजाम दे चुका है मगर मुताल्लिक़ा महिकमा से मुतअद्दिद नुमाइंदगियों के बावजूद ताहाल बिल की अदायगी नहीं की जा रही है,जिसकी वजह से वो मज़ीद काम अंजाम देने में माज़रत का इज़हार कर रहे हैं।

जबकि दूसरी तरफ़ ज़राए का ये भी कहना है कि किसी भी सरकारी फंड्स की इजराई ,मुताल्लिक़ा ज़िम्मादारों तक रक़म की रसाई और उसके हुसूल के दरमियान बदउनवानी का जो रिवायती मामला दरपेश आता है ,वही मुआमला यहां प्रभी दरपेश है,ताहम इस दावे की मोतबर ज़राए से तौसीक़ नहीं होसकी। सवाल ये है कि तज़ईन नौ के कामों की मुअत्तली में अगरबल की अदमे अदाइगी ही अहम वजहा है तो मुताल्लिक़ा रुकन असेम्बली ,मुक़ामी समाजी तनज़ीमें और मुताल्लिक़ा एसोसीएशन‌ आख़िर क्या कररही हैं? ये लोग मुतल्लक़ा महिकमा पर दबाओ डालते हुए इस तारीख़ी इमारत की तज़ईन नौ के कामों की तकमील में संजीदा दिलचस्पी का मुज़ाहरा क्यों नहीं करते?

ये तो सभी जानते हैं कि जो मामलात उमूमी तौर पर मुसलमानों से ताल्लुक़ रखते हैं वहां सरकारी महिकमा और ब्यूरोक्रेसी में रिवायती मुतासबाना पॉलीसी ज़रूर पाई जाती है,इसी दवाखाने की मिसाल ले लीजिए , यहां सब से अहम मसला पैरामैडीकल स्टाफ़ की सख़्त कमी का है जहां,मुख़्तलिफ़ ज़मुरा जात के तकरीबन 65ता5 जायदाद यं मख़लवा हैं जिन्हें पर करने केलिए बरसोस से नुमाइंदगी की जा रही है मगर कोई नतीजा बरामद नहीं होसका, इसी तरह कारपेंटर ,टेलर ,धोबी ,साफ़ सफ़ाई और दीगर ज़मुराजात की जाइदा दें बरसों से मख़लवा हैं मगर उन्हीं पर करने पर कभी संजीदा तोजहा नहीं दे जाती ।

यहां यौमिया हज़ार ता देढ़ हज़ार मरीज़ रुजू होते हैं और 250 बिस्तरों पर मुश्तमिल इस दवाखाने में मरीज़ों केलिए मतलूबा बेड्स भी कम पड़ जाते हैं । मगर उसके बावजूद मख़लवा जायदादों को पर करने के बजाय मुताल्लिक़ा महिकमा हमशा टाल मटोल का रवैया इख़तियार करता जा रहा है जिस से ना सिर्फ़ मरीज़ों को मुनासिब ईलाज विम्मा लज्जा फ़राहम करने में दुशवारी पेश आरही है बल्कि मरीज़ों की बढ़ती तादाद से मौजूद स्टाफ़ पर काम का दबाओ भी बढ़ता जा रहा है । उसे हालात में हुकूमत ने कम-अज़-कम तज़ईन नौ केलिए जो फंड्स जारी किए हैं , अगर उसका भी सहीह इस्तेमाल हम नहीं करवा पाते हैं तो हम किस मुँह से सिर्फ़ हुकूमत को इसका ज़िम्मेदार क़रार दे सकते हैं।

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