Wednesday , December 13 2017

निज़ाम्स ट्रस्ट के मुलाज़मीन को जबरन सुबुकदोशी के इल्ज़ामात मुस्तरद

एच ई एच निज़ाम्स चैरिटेबल ट्रस्ट ने बाअज़ साबिक़ मुलाज़मीन के इन इल्ज़ामात को मुस्तरद कर दिया कि उन्हें जबरन रज़ाकाराना सुबुकदोशी के लिए मजबूर किया गया। ट्रस्ट के बाअज़ साबिक़ मुलाज़मीन की शिकायात के बारे में वज़ाहत जारी करते हुए सेक्रेट्री एच ई एच निज़ाम्स चैरिटेबल ट्रस्ट ने बताया कि ट्रस्ट की आमदनी में कमी और स्टाफ़ के अख़राजात में इज़ाफ़ा को देखते हुए रज़ाकाराना सुबुकदोशी की स्कीम शुरू की गई।

उन्होंने बताया कि 70 फ़ीसद रक़म मुलाज़मीन पर ख़र्च की जा रही थी और ट्रस्ट के अग़राज़ और मक़ासिद की तकमील के लिए इंतिहाई कम रक़म बच रही थी जिसके पेशे नज़र 2002 और 2008 में रज़ाकाराना सुबुकदोशी की स्कीम मुतआरिफ़ की गई।

2002 में 19 और 2010 में 17 मुलाज़मीन ने रज़ाकाराना सुबुकदोशी अख़तियार करली। गुज़िश्ता 60 बरसों के दौरान ट्रस्ट क़ियाम के मक़ासिद की तकमील कर रहा है।

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