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नुमाइश में ज़िंदा तिलसमात का गोल्डन जुब्ली स्टाल

हैदराबाद ०९ जनवरी : कल हिंद सनअती नुमाइश में ज़िंदा तिलसमात की स्टाल का 9 जनवरी की शाम 4 बजे पद्मश्री बेगम बिलकीस लतीफ़ इफ़्तिताह करेंगी । आज यहां एक प्रैस कान्फ़्रैंस से ख़िताब करते हुए कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात के वर्किंग पार्टनर

हैदराबाद ०९ जनवरी : कल हिंद सनअती नुमाइश में ज़िंदा तिलसमात की स्टाल का 9 जनवरी की शाम 4 बजे पद्मश्री बेगम बिलकीस लतीफ़ इफ़्तिताह करेंगी । आज यहां एक प्रैस कान्फ़्रैंस से ख़िताब करते हुए कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात के वर्किंग पार्टनर्स जनाब उवैस उद्दीन फ़ारूक़ी और सुहेल उद्दीन फ़ारूक़ी ने बताया कि कल हिंद सनअती नुमाइश में ज़िंदा तिलसमात स्टाल का ये गोल्डन जुबली साल है। गज़शा 50 बरस से सनअती नुमाइश में ज़िंदा तिलसमात स्टाल बाक़ायदगी से क़ायम की जाती है । हमेशा से यहां ख़रीदारों को पुरकशिश इनामात की पेशकश की जाती है ।

इस मर्तबा गोल्डन जुबली साल के मौक़ा पर पहले ही दिन से नुमाइश के इख़तताम तक हर साल की तरह नुमाइश स्टाल पर ज़िंदा तिलसमात प्रॉडक्ट्स के ख़रीदारों को क़ुरआ अंदाज़ी के ज़रीया पुरकशिश इनामात पेश की जाएंगी।

रोज़ाना एक हज़ार रुपय नक़द , वीकली डरा में एक ग्राम सोने का सिक्का इनाम में दिया जाएगा जबकि आख़िरी दिन बंपर प्राइज़ टाटा नानू कार दी जाएगी । दूसरा इनाम 165 लीटर का रेफ्रीजरेटर और तीसरा इनाम माईक्रो ओवन दिया जाएगा । वर्किंग पार्टनर्स ने कहा कि कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात अपने 93 वीं बरस में क़दम रख चुका है । 1920 -ए-में हकीम मुहम्मद मुइज़ उद्दीन फ़ारूक़ी ने दो मक़ासिद के साथ कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात क़ायम किया था।

पहला मक़सद एक ऐसी यूनानी दवा जो ग़रीब तरीन अवाम को आसानी के साथ मयस्सर होसके और वो हर किस्म के मुज़िर असरात से पाक-ओ-साफ़ हो। दूसरा मक़सद रोज़गार की फ़राहमी चुनांचे 93 वीं बरस में कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात दो मक़ासिद की कामयाबी के साथ तकमील कर रहा है। ज़िंदा तिलसमात इन बावक़ार इदारों में से एक है जिसे आसिफ़ जाह साबह नवाब मीर उसमान अली ख़ान ने मुस्लिमा हैसियत अता की थी ।

चुनांचे इस का ट्रेड मार्क आसिफ़ जाह दस्तार है। वाज़िह रहे कि हैदराबाद में सिर्फ़ ज़िंदा तिलसमात और हमीदी कनफ़कशनरस दो ही ऐसे इदारे हैं जिन का ट्रेड मार्क आसिफ़ जाहि दस्तार है । कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात की अज़मत , वक़ार , मक़बूलियत और एतिमाद का दस्तार अब भी बरक़रार है।

जनाब साद फ़ारूक़ी ने बताया कि कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात के पार्टनर्स जनाब मुहम्मद रॶफ़ उद्दीन फ़ारूक़ी और जनाब मुहम्मद मसीह उद्दीन फ़ारूक़ी हैं जबकि नई या तीसरी नसल की नुमाइंदगी करने वाले मुहम्मद उवैस उद्दीन फ़ारूक़ी और मुहम्मद सुहेल उद्दीन फ़ारूक़ी वर्किंग पार्टनर्स हैं।

पेशरू नसल का जज़बा और तजुर्बा नई नसल की आला तालीम और नई रोशनी से हम आहंगी कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात के प्रॉडक्ट्स को 21 वीं सदी में मक़बूल तरीन बनाने के लिए अपनी कोशिश जारी रखे हुए हैं । अंबर पैन में कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात की क़दीम इमारत जिस की तज़ईन और तामीर-ए-नौ हुई है । यूनिट हैं। ज़िंदा तिलसमात की तैय्यारी और पिया केजिंग यहीं पर होती है । इंतिज़ामीया और मुलाज़मीन के दरमयान ख़ुशगवार ताल्लुक़ात है यहां 1956 -ए-से ट्रेड यूनीयन है । मुलाज़मीन और इंतिज़ामीया अरकान ख़ानदान की तरह मिल जल कर रहते हैं।

हकीम मुइज़ उद्दीन फ़ारूक़ी मरहूम ने जब कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात क़ायम किया था तो उन के दो मक़ासिद थी, एक तो साईड एफ़कट से आज़ाद-ओ-बेनयाज़ दवा ग़रीब से ग़रीब अफ़राद को मयस्सर होसके और इस कारख़ाना से रोज़गार की फ़राहमी यक़ीनी हो जाए ।

चुनांचे 21 वीं सदी में भी जबकि जदीद टैक्नालोजी का इस्तिमाल करते हुए लेबरस की तादाद को कम से कम किया जाता है कारख़ाना ज़िंदा तिलसमात के इंतिज़ामीया ने अभी भी इस किस्म के टैक्नालोजी और मशीनों के इस्तिमाल से गुरेज़ किया है जिस की वजह से मेहनतकशों की तादाद मुतास्सिर हो।

चुनांचे आज इस कारख़ाना में तीसरी नसल के मेहनत कश ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं यानी दादा ने भी ख़िदमात अंजाम दें , वालिद ने भी और अब पोतरे भी। ज़िंदा तिलसमात के इंतिज़ामीया और मुलाज़मीन के दरमयान क़ुरबत , मुहब्बत , जज़बाती लगाॶ नसल दर नसल साथ साथ है और साथ रहेगा।

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