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नुसरत फ़तह अली ख़ां को गूगल का ख़िराज-ए-अक़ीदत

मुंबई: बैन-उल-अक़वामी शौहरत-ए-याफ़ता क़व्वाल उस्ताद नुसरत फ़तह अली ख़ां को उनकी 67वीं यौम-ए-पैदाइश के मौक़े पर गूगल ने बतौर ख़िराज-ए-अक़ीदत उन्हें सर-ए-फ़हरिस्त मुक़ाम अता किया है जबकि गूगल खोलते ही उनकी तस्वीर नज़र आएगी।

नुसरत फ़तह अली ख़ां 13अक्टूबर 1948 को फैसलाबाद पाकिस्तान में पैदा हुए थे और सूफियाना क़व्वालियों के ज़रिए बैन-उल-अक़वामी शौहरत पाई थी।

उनकी मौत क़लब पर हमले के बाइस 48साल की उम्र में 17अगस्ट 1997 को हुई थी। उन्होंने मशहूर कव्वालियां और सूफियाना कलाम-अल्ला हू । आफ़रीं आफ़रीं, तेरे बिन नहीं लगता, तुम्हें दिल-लगी भूल जानी पड़ेगी पेश की थीं और हिन्दी फिल्मों धड़कन कच्चे धागे, प्यार हो गया और मौसीक़ी तर्तीब दी थी।

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