Tuesday , December 12 2017

नेस्ले की ‘मैगी’ ताजा जांच में एक बार फिर नाकाम साबित, लगा 45 लाख का जुर्माना

शाहजहांपुरः अपनी गुणवत्ता को लेकर पूर्व में सवालों से घिरी रही नेस्ले की ‘मैगी’ ताजा जांच में एक बार फिर नाकाम साबित हुई है। प्रशासन ने कड़ी कार्यवाई करते हुए नेस्ले कंपनी समेत डिस्ट्रीब्यूटर और विक्रेताओं पर 62 लाख का जुर्माना ठोका है। मैगी सैम्पल फेल होने पर 45 लाख का जुर्माना नेस्ले कम्पनी पर लगाया गया है जबकि डिस्ट्रीब्यूटर समेत छह बिक्रेताओं समेत पर 17 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

गौरतलब है कि पिछले साल नवम्बर में पूरे जिले में छापेमारी कर मैगी के सैम्पल लिए गए थे। सैम्पल फेल होने पर कोर्ट मे चले केस में सभी साक्ष्यों के आधार पर अपर जिलाधिकारी जितेन्द्र शर्मा ने कड़ी कार्यवाई करते हुए 62 लाख का जुर्माना लगा दिया। प्रदेश में अबतक की सबसे बडी कार्यवाई से व्यापारियो में हड़कंप मचा हुआ है।

बताया जा रहा है कि मैगी सैम्पल की जांच में ऐश की मात्रा एक आनी चहिए थी, लेकिन यह मात्रा मानक से ऊपर तीन गुनी ज्यादा पाई गई। जिलाधिकारी ने बताया कि चूंकि मैगी बच्चे ज्यादा खाते हैं, लिहाजा ऐश की ज्यादा मात्रा उनके सेहत पर बुरा असर डाल सकती है।

बता दें कि 2015 मे 29 व 30 मई और आठ व 12 जून को जिले मे विभिन्न स्थानों से नेस्ले के वितरकों और विक्रेताओं से मैगी छोटू, मैगी टू मिनट्स नूडल, मैगी मसाला, मैग वेज आटा नूडल्स, मैगी मीट्रिलिटियस, मैगी पास्ता आदि उत्पादों के सात नमूने सील किए थे। न्याय निर्णायक अधिकारी /एडीएम प्रशासन जितेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि सील किए गए नमूने जांच के लिए लखनऊ स्थित राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला में भेजे गए थे। जांच मे पाया गया कि उनमे एश कंटेट (धातु भस्म) की मात्रा निर्धारित मानक से कई गुना अधिक पाई गई है। इस मामले मे मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा दर्ज कराए मुकदमों की सुनवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 51 के तहत नेस्ले कंपनी को 35 लाख रुपये और उसकी इकाईयों के संचालकों को पांच-पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

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