Monday , June 18 2018

नोटबंदी को सही ठहराने के लिए मोदी करेंगे यूपी में पांच रैलियां

फैसल फरीद 

लखनऊ: जब देश नोटबंदी के कारण परेशानियों से जूझ रहा है, तब भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पकड़ को मज़बूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की पांच बड़ी रैलियों की योजना बनाई है.

मोदी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में 14 नवम्बर को एक रैली को पहले ही संबोधित कर चुके हैं और उन्होंने उस मौके को अपने नोटबंदी के फैसले को सही ठहराने के लिए भी इस्तेमाल किया था. उन्होंने अपने भाषण के दौरान अपने फैसले को कड़क चाय की तरह कड़क बताया था. मोदी ने रैली का उपयोग अपनी पार्टी के काले धन के प्रति सख्त रवैये को पेश करने के लिए किया. उन्होंने आने वाले दिनों में कुछ और अधिक कठोर कदम उठाने का संकेत भी दिया.

अब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम से जनता को हो रही परेशानियों को सामने लाने का मिशन शुरू कर दिया है. बसपा प्रमुख मायावती ने इसे आर्थिक आपातकाल करार दिया है, जबकि सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह ने इसे जनता को प्रभावित करने वाला अनुचित निर्णय करार दिया है।

ऐसे समय में जब आम जनता को बैंक में नकद जमा करने व् निकालने के लिए घंटो कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है तब भाजपा ने उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री की पांच रैलियों की योजना बनाई है. इन रैलियों के दौरान मोदी नोटबंदी के अपने फैसले के बारे में अपने विचार व्यक्त करेंगे.

ख़बरों के मुताबिक मोदी अपनी पहली रैली 20 नवंबर को आगरा में संबोधित करेंगे और इसके बाद 27 नवंबर को कुशीनगर में। इसके बाद वे मुरादाबाद में 3 दिसंबर, बहराइच में 11 दिसंबर और कानपुर में 18 दिसंबर को रैली को संबोधित करेंगे।

भाजपा नोटबंदी की वजह से आम जनता को हो रही कठिनाइयों के ज़रिये किसी विपक्षी दलों को कोई मुद्दा नहीं देना चाहती है. ऐसा माना जा रहा है कि मोदी की इन में रैलियों में भाजपा उन परिस्तिथियों को जनता के सामने पेश करेगी जिसके तहत यह फैसला लिया गया है.

भाजपा की राज्य इकाई ने अपनी अन्य इकाइयों को इन रैलियों में पड़ोसी जिलों से भी तभी तादाद भीड़ को इकठ्ठा करने के निर्देश दिए हैं. यह रैलियां भाजपा की परिवर्तन यात्रा की रैलियों से भिन्न हैं.

हालाँकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी दलों के लिए भाजपा को नोटबंदी के मुद्दे पर घेर पाना मुश्किल है. ऐसी उम्मीदें हैं कि अभी आने वाले दिनों में विपक्षी दलों को चोंकाने के लिए और कदम उठाये जा सकते हैं.

TOPPOPULARRECENT