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नोटबंदी पर ओवैसी के बयान के बाद सोशल मीडिया में हुई फजीहत

देश में नोटबंदी के बाद जहां एक तरफ सभी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो वही दूसरी तरफ एआइएमआइएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी इसको अलग ही एंगल दे रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि मोदी सरकार मुस्लिमों के साथ नाइंसाफी कर रही है। हैदराबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा, ‘मोदी सरकार नोटबंदी लागू कर मुसलमानों को परेशान कर रही है। मुस्लिम बहुल इलाकों के एटीएम खाली पड़े हैं। वहां नए नोट नहीं पहुंचाए जा रहे हैं।

ओवैसी के इस बयान के सियासत भी गर्म हो गई है। केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने ओवैसी नोटबंदी पर सियासत कर रहे हैं। सोशल मीडिया में भी औवैसी के इस बयान के बाद कई टिप्पणी आई है।

फेसबुक में मोहम्मद जाहिद लिखते हैं

ऐसे बयान बेतुके हैं और गैरजिम्मेदार हैं, देश में जहाँ विमुद्रीकरण से 120 लोगों की जान गयी है तो उसमें कुछ मुसलमान भी हो सकते हैं , जहाँ देश में सभी करेन्सी की किल्लत से परेशान हैं उनमें मुसलमान भी हो सकते हैं और यह भी हो सकता है कि कुछ एक बैंक की शाखाएँ जो मुस्लिम बहुल क्षेत्र में हों वहाँ कैश की समस्या अधिक हो तो यह भी सामान्य बैंकिंग समस्या से अधिक कुछ नहीं बल्कि इससे बदतर स्थिति कुछ हिन्दू बहुल क्षेत्र के बैंक की शाखाओं में भी हो सकती है।

वसीम अकरम त्यागी लिखते हैं

आदरणीय असदुद्दीन औवेसी
विमुद्रीकरण से पूरा देश परेशान है यह कहना सही है मगर जब आप कहते हैं कि सिर्फ मुसलमान परेशान हैं तब आप भाजपा को मुद्दा दे रहे होते हैं, पूरा देश जान रहा है कि नोटबंदी का फैसला भाजपा के गले की हड्डी बन गया है। मगर आप हैं कि उसे मुद्दा दे रहे हैं, सिर्फ मुस्लिम विरोधी ही तो भाजपा का खाद्य पानी रहा है, क्या आप इतना भी नही समझते ?

आपने तो कह दिया कि मुस्लिम इलाको के एटीएम में सरकार पैसा नही भेज रही है कभी आपने उन एटीएम को भी देखा जो मुसलमानो के इलाको में तो नहीं हैं मगर उन पर ताला लटका हुआ है। जनता आपको भी समझ रही है और भाजपा को भी। बंगाल चुनाव के दौरान जब भाजपा बैकफुट पर थी तब भी उसे मुद्दा देने वाले आप ही थे आपने ही कहा कि गर्दन पर छुरी भी रख दे तो भी आप भारत माता की जय नहीं बोलेंगे।

क्या आपने बताया कि वह कौन शख्स था जिसने आपसे आकर कान में कहा था कि भारत माता की जय बोलो वरना गर्दन पर छुरी रख दी जायेगी ? गर कोई ऐसा शख्स था तो उसका नाम सार्वजनिक क्यों नहीं करते ? और अगर नहीं था और यह बयान आपके दिमाग की उपज था तो आपने भाजपा को मुद्दा क्यों दिया ? जानते हो आपके छुरी रखना कहते ही ‘राष्ट्रवादी’ आतंकी सड़कों पर उतर आये और राह चलते राहगीर को पकड़कर जबरन भारत माता की जय कहलवाने लगे और न कहने वालो के हाथ पैर तोड़ डाले, यह सब आपकी बदौलत हुआ ‘नकीब ऐ मिल्लत’ साहब।

सैयद फैजान जैदी लिखते हैं

तमाम मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल बैंक नहीं है, यह सच है। मगर ओवैसी साहब ने कभी इसके लिए आंदोलन नहीं किया। हालांकि ओवैसी साहब कभी संघर्ष करते तो यकीनन आज मुस्लिम समाज के बड़े नेता होते।

आज देश में मोदी के खिलाफ विरोध के स्वर उठ रहे हैं। ऐसे में ओवैसी साहब नोटबंदी के मुद्द्दे को हिन्दू मुस्लिम बना कर मामले को सांप्रदायिक विभाजन की ओर ले जा रहे है।
ज़ाहिर है कि अगर ये मुद्दा साम्प्रदायिक हुआ तो इसका सीधा फायदा मोदी को मिलेगा। लिहाजा अभी चुप रहें ओवैसी साहब। मोदी जी के शतरंज का मोहरा बन कर अपने वालिद सलाहुद्दीन साहब का शानदार इतिहास कलंकित न करिए।

 

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