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नज़रियाती इख़तेलाफ़ात के क़त-ए-नज़र पण्डित नहरू की ख़िदमात नाक़ाबिल फ़रामोश

नई दिल्ली: मर्कज़ी वज़ीर-ए-दाख़िला राजनाथ सिंह ने आज मुल्क के पहले वज़ीर-ए-आज़म जवाहर लाल नहरू को गुलहाए अक़ीदत पेश करते हुए कहा कि नज़रियाती इख़तेलाफ़ात के बावजूद अवाम की फ़लाह-ओ-बहबूद और क़ौम की तामीर के लिए उनके अज़ाइम और इरादों पर कोई शुबा नहीं करसकता।

पण्डित नहरू की 125 वीं यौम-ए-पैदाइश से मुख़ातिब करते हुए कहा कि हमें उनकी ( नहरू ) पालिसीयों से शदीद इख़तेलाफ़ात है लेकिन मुल्क-ओ-क़ौम की तामीर-ओ-तरक़्क़ी के लिए उनके बुलंद अज़ाइम पर अंगुश्तनुमाई की जा सकती है। सीनियर बी जे पी लीडर ने कहा कि नहरू को सियासी आईने में एक कांग्रेसी की हैसियत से नहीं बल्कि हमेशा क़ौमी नुक़्ता-ए-नज़र से देखते आए हैं।

वज़ीर-ए-दाख़िला ने बताया कि पण्डित नहरू जैसे लीडरों की गिरांक़द्र ख़िदमात की बदौलत हिन्दुस्तान में आज एक कारकरद पारलियामेंट फाल ब्यूरोक्रेसी ( आफ़िसरशाही) आज़ाद अदलिया और बे-बाक सहाफ़त का वजूद अमल में आया है और पण्डित नहरू जैसे लीडरो की वजह से हिन्दुस्तान आज दुनिया में एक बड़ी जम्हुरियत बन कर उभरा है और अब जम्हुरियत की कामयाबी का जश्न मना रहा है ।

उन्होंने कहा कि पण्डित नहरू की दूर अंदेशी और फ़हम-ओ-फ़िरासत के बाइस बहलाई और रिवर केला में बड़ी सनतों और आई आई टी और आई आई ऐम जैसे तालीमी इदारे और ऐटमी प्लांटस क़ायम किए गए। अगर नहरू को मुल्क‌ में ज़रई शुबा की एहमियत का इल्म था लेकिन सनतों के क़ियाम पर तवज्जा मर्कज़ की थी।

वज़ीर-ए-दाख़िला ने बताया कि पण्डित नहरू ने हमेशा बच्चों के मुनासिब तालीम और रहनुमाई के लिए जुस्तजू की थी क्योंकि उन्हें ये एहसास था कि हिन्दुस्तान एक तरक़्क़ी पज़ीर मुल्क है और यहां के बच्चों को बेहतरीन तालीम-ओ-तर्बीयत की ज़रूरत है। मिस्टर राजनाथ सिंह ने कहा कि पण्डित नहरू अपने दौर के बलंद क़ामत आलमी लीडर और उनकी निडर क़ियादत में ग़ैर जांबदाराना तहरीक का क़ियाम अमल में लाया गया था । जबकि मईशत साईंस टेक्नोलोजी पर नहरू की पालिसीयां काबिल-ए-सताइश हैं जिन्होंने अवामी और ख़ानगी शराकतदारी से पर एक़्टियस शुरू किए थे जो कि दौर-ए-हाज़िर की ज़रूरत बन गए हैं।

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