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न स्वच्छता है न शौचालय

भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जून 2014 में संसद को संबोधित करते हुए कहा था “देश में जल्द ही स्वच्छ भारत मिशन शुरु किया जाएगा, जो देश भर में स्वच्छता, वेस्ट मैंनेजमेंट, को सुनिश्चित करने के लिए होगा। यह मिशन महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर 2019 में हमारी ओर से श्रद्धांजली होगी”।

महात्मा गांधी के सपने को पूरा करने और दुनिया में भारत को आदर्श देश बनाने के क्रम में भारत के प्रधानमंत्री ने 2 अक्टुबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की जिसके अंतर्गत 2019 तक देश को स्वच्छ एंव स्वस्थ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी क्रम में ग्रामीण स्वच्छ भारत मिशन को भी सम्मिलित किया गया है जिसका उद्देश्य ग्रामीणो को खुले में शौच करने से रोकना है। इसके लिए सरकार ने 11 करोड़ 11 लाख शौचालय के निर्माण के लिए एक लाख चौतिस हजार करोड़ की राशि खर्च करने की योजना बनाई है।

लेकिन बिहार के कई गांव में शैचालय और स्वच्छता की स्थिति को देखकर ऐसा नही लगता कि ये गांव ग्रामीण स्वच्छ भारत मिशन की श्रेणी में सम्मिलित हैं। इस संबध में जब कुशैल गांव के वार्ड नंबर 14 में रहने वाले 30 वर्षिय देव राय से बात की गई तो उन्होने बताया “ हमारे गांव मे सड़क नही है जिस कारण बरसात के समय में बहुत पानी जमा हो जाता है, किसी तरह आना- जाना होता है लेकिन जमा हुआ पानी से बहुत बदबू आती है और गंदगी के कारण हमलोग को बहुत परेशानी है, सांप बिच्छु का भी डर बना रहता है”। लक्ष्मण महतों कहते हैं कि “हमलोग के घर के पास 30 साल से नाले का पानी बह रहा है सही से कोई रास्ता नही कि पानी निकल सके, इससे दिन में तो दिक्कत होएवे करता है रात के बेला में तो गिरने पड़ने का भी डर रहता है और बहुत लोग गिरबो किए हैं।“

अधिर राय कहते हैं हमारे गांव में सबके यहां शौचालय भी नही है बहुते कम घर मे हैं इसी कारण रात के समय में तो बाहर जाना पड़ता है, खेत खलिहान में रात बे रात महिला और बच्चा सब के ले जाने मे बहुत दिक्कत होता है।“

60 वर्षिय महिला ने बताया” शादी करके गांव मे आए थे तबसे अबतक घर में शौचालय नही बना है एक तो चलने मे दिक्कत है उपर से दिखाई भी कम देता है तो शौचालय के लिए खेत मे जाने मे बहुत परेशानी है बिटिया”।

25 साल की वंदना कुमारी कहती हैं “शादी हुए 5 साल हो गए दो छोटे बच्चें हैं दोनो बेटा हमेशा बिमारे रहता है। हर तरफ सड़क नही है तो पानी मे घुस घुस के यहां वहा जाता है और शौचालय के लिए खेत में जाता है ता बिमार तो पड़वे करेगा न? हम तो इनको कितना बोलें कि घर में छोटा सा शौचालय बनवा दे लेकिन बोलते हैं कि उतना पैसा कहां से लाएगें”।

सीता देवी ने कहा “हमलोग के पास शौचालय नही है। रात बे रात शौचालय के लिए बाहर जाते हैं तो गंदगी भी पैर मे लग जाती है। बहुत दिक्तत होती है, लेकिन का करें मजबूरी में तो सब करना पड़ता है। घर में शौचालय होता तो इ दिन नही देखना पड़ता”।

एक ओर लोगों की परेशानीयां हैं और दूसरी ओर स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य जिसे पूरा होने में लगभग 3साल बचें हैं। ऐसे में कुशैल गांव और देश के अन्य गांव की स्थिति में बदलाव आ पाएगा या नही ये कहना मुश्किल जरुर है लेकिन इस मिशन को जनता और सभी राजनीतिक पार्टियों का पूरा पूरा सहयोग मिलें तो लक्ष्य को पाना आसान हो सकता है। और हम अपने बच्चों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ देश का निर्माण कर सकते हैं।

फरजाना खातून
बछारपुर(बिहार)

(चरखा फीचर्स)

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