पत्रकार ख़ाशुक़जी हत्या कांड में सऊदी अरब पर अमरीका और तुर्की का नया प्रहार !

पत्रकार ख़ाशुक़जी हत्या कांड में सऊदी अरब पर अमरीका और तुर्की का नया प्रहार !

सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान इस कोशिश में है कि समय बीतने के साथ साथ ख़ाशुक़जी हत्या कांड का मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाए लेकिन थोड़े थोड़ दिन पर यह मामला नए सिरे से उछल जाता है।

ताज़ा घटना क्रम में अमरीका के रिपब्लिकन सिनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि मुहम्मद बिन सलमान पर अमरीका की ओर से प्रतिबंध ज़रूर लगेंगे क्योंकि यह संभव ही नहीं है कि बिन सलमान की सूचना के बग़ैर यह हत्या हुई हो।

वाशिंग्टन में एक कार्यक्रम में मीडिया के सवाल के जवाब में ग्राहम ने कहा कि सऊदी क्राउन प्रिंस पर प्रतिबंध लगेंगे और वह इन प्रतिबंधों का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि सऊदी अरब को अमरीका का स्ट्रैटेजिक पार्टनर बने रहना है तो उसे अपना रवैया बदलना होगा। उन्होंने कहा कि हम सऊदी अरब से अच्छे संबंध चाहते हैं लेकिन हर क़ीमत पर नहीं।

ग्राहम ने कहा कि वह सऊदियों से यही नहीं कहते कि किसे अपने शासक चुनें लेकिन यदि वह इन हालात में अमरीका के साथ स्ट्रैटेजिक संबंध चाहते हैं तो यह संभव नहीं होगा।

दूसरी ओर तुर्की ने भी सऊदी अरब के खिलाफ़ एक बड़ा क़दम उठाते हुए कहा है कि ख़ाशुक़जी की हत्या में शामिल 20 लोगों की टीम पर वह अपनी धरती पर मुक़द्दमा चलाना चाहता है। तुर्की ने कहा है कि हत्या में शामिल 20 सऊदी नागरिकों के नाम इंटरपोल ने अपनी वांटेड लिस्ट में शामिल कर लिया है और उनके ख़िलाफ़ रेड कार्नर नोटिस जारी कर दिए हैं।

तुर्की के न्याय मंत्रालय ने एक बयान जारी करके बताया कि इंटरपोल ने मार्च महीने के शुरू में ही उन 20 सऊदी नागरिकों के ख़िलाफ़ रेड कार्नर नोटिस जारी कर दिए हैं जिन पर तुर्क सरकार अपने देश के भीतर मुक़द्दमा चलाना चाहती है। न्याय मंत्रालय ने कहा कि उसने नवम्बर महीने में इंटरपोल से मांग की थी कि 20 सऊदी संदिग्धों के नाम रेड कार्नर नोटिस जारी किया जाए।

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान यह भी कह चुके हैं कि वह ख़ाशुक़जी हत्या कांड का मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाय में ले जाएंगे।

उधर सऊदी अरब का कहना है कि इस हत्या कांड में अंतर्राष्ट्रीय जांच की कोई ज़रूरत नहीं है। सऊदी अरब के मानवाधिका आयोग के प्रमुख बंदर बिन मुहम्मद अलएबान ने कहा कि ख़ाशुक़जी हत्या कांड की किसी भी अंतर्राष्ट्रीय जांच की ज़रूरत नहीं है।

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