पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या या लापता होने में सऊदी अरब का नाम साबित हुआ तो अंजाम खतरनाक होगा- अमेरिका

पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या या लापता होने में सऊदी अरब का नाम साबित हुआ तो अंजाम खतरनाक होगा- अमेरिका

इस प्रकरण को लेकर विश्व स्तर पर तूफ़ान मचा हुआ है। हालत यह हो गई है कि ट्रम्प प्रशासन पर भी अमरीका के भीतर से दबाव पड़ने लगा है और उन्होंने अपने ताज़ा बयान में कहा है कि अब तक तो यही प्रतीत हो रहा है कि वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या या लापता होने में सऊदी अरब लिप्त है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका देश और तुर्की इस मामले पर नज़र रखे हुए हैं और जल्द ही मामले की तह तक पहुंच जाएंगे। ट्रम्प ने यह भी कहा कि सऊदी अरब से हथियारों के सौदे पर बातचीत से पहले जमाल ख़ाशुक़जी के मुद्दे पर बात होगी और यदि उनकी हत्या या लापता होने में सऊदी अरब की संलिप्तता साबित हो जाती है तो यह भयानक बात होगी।

ट्रम्प ने फ़ाक्स न्यूज़ से बातचीत में यह बात कही जबकि इससे पहले उन्होंने कहा था कि सऊदी अरब के उच्चाधिकारियों से इस मामले में उनकी बात हुई है। ट्रम्प ने ख़ाशुक़जी की मंगेतर को वाइट हाउस आमंत्रित किया है।

अमरीकी सिनेट की विदेशी मामलों की कमेटी के सदस्यों ने राष्ट्रपति ट्रम्प को एक पत्र भेजा है जिसमें मांग की गई है कि वह इस मामले की जांच करवाएं।

ट्रम्प की ओर से इस मामले में बयान काफ़ी विलंब से आया। टीकाकार यह समझते हैं कि ट्रम्प पहले तो इस मामले को टालने की कोशिश कर रहे थे लेकिन जब हंगामा ज़्यादा हो गया और उन पर दबाव बढ़ने लगा तो फिर राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस विषय में बयान दिया। कांग्रेस की ओर से पड़ने वाला सबसे अधिक कारगर साबित हुआ है।

सिनेट में विदेशी मामलों की कमेटी के प्रमुख बाब क्रोकर ने बयान दिया कि उन्हें इंटैलीजेन्स सूचनाएं मिली हैं जिनसे उन्हें विश्वास हो गया है कि इस्तांबूल में सऊदी वाणिज्य दूतावास के भीतर ख़ाशुक़जी की हत्या कर दी गई।

अब यह संभावना भी जताई जा रही है कि अमरीकी फ़ेडरल जांच एजेंसी एफ़बीई भी इस मामले में हस्तक्षेप कर सकती है क्योंकि इस प्रकरण के बारे में होने वाली बातचीत में संभावित रूप से अमरीका में सऊदी अरब के राजदूत ख़ालिद बिन सलमान भी शामिल हैं जो मुहम्मद बिन सलमान के भाई हैं। वाशिंग्टन पोस्ट ने यह रिपोर्ट प्रकाशित की है कि अमरीकी इंटैलीजेन्स ने अमरीका में ख़ाशुक़जी के अपहरण और हत्या के बारे में होने वाली गुप्त बातचीत का सुराग़ लगाया है।

टीकाकार कहते है। कि इस पूरे प्रकरण में सबसे ख़तरनाक आयाम यह है कि सऊदी दूतावास ने योजनाबद्ध तरीक़े से ख़ाशुक़जी को फंसाया और यह आश्वासन दिलाया कि अमरीका स्थित सऊदी दूतावास में नहीं बल्कि इस्तांबूल में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में उन्हें वह दस्तावेज़ दिए जाएंगे जिसके आधार पर वह तुर्क मंगेतर से विवाह कर सकेंगें।

यदि यह विचार सही है तो जांच में एफ़बीआई की शामिल होना तय है क्योंकि योजना में अमरीका स्थिति सऊदी दूतावास भी शामिल है। एफ़बीआई अमरीका में सऊदी दूतावास के कर्मचारियों ही नहीं सऊदी अरब के अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए तलब कर सकती है।

इस बीच वाशिंग्टन पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमरीकी इंटेलीजेन्स को यह पता चल गया था कि सऊदी सरकार साज़िश के तहत जमाल ख़ाशुक़जी को फंसाना चाहती है और उन्हें धर दबोचने की एक जटिल योजना बना रही है।

वाशिंग्टन पोस्ट ने अमरीकी अधिकारियों के हवाले से लिखा कि उन्होंने सऊदी अधिकारियों को यह बात करते सुना था कि ख़ाशुक़जी को अमरीका के राज्य वर्जीनिया से जहां वह रहने लगे थे बहाने से बाहर बुलाया जाए और फिर उन्हें गिरफ़तार किया जाए।

इसके लिए ख़ाशुक़जी के सामने सऊदी दूतावास की ओर से बड़े अच्छे प्रस्ताव रखे गए थे। सऊदी अधिकारियों ने उन्हें यहां तक आश्वासन दिलाया था कि रियाज़ सरकार उन्हें हर प्रकार की सहूलत उपलब्ध करवाने के लिए तैयार है।

सरकार की यह उदारता देखकर ख़ाशुक़जी को शंका होने लगी थी और उन्होंने कई मित्र पत्रकारों के बीच कहा था कि रियाज़ सरकार की ओर से दिए जाने वाले लुभावने प्रस्ताव बहुत संदिग्ध हैं।

टीकाकार यह मानते हैं कि सऊदी सरकार ने अमरीका से संबंध ख़राब हो जाने के डर से ख़ाशुक़जी के ख़िलाफ़ अमरीका के भीतर कुछ नहीं किया बल्कि उन्हें बहाने से तुर्की बुलवाया ताकि अमरीका से संबंध खराब न हों और तुर्की से सऊदी अरब के संबंधों में काफ़ी तनाव है।

तुर्की एसा देश है जहां को अरब डिक्टेटरों के विरोधी शरण लेते हैं और ख़ुद को सुरक्षित समझते हैं। सऊदी सरकार ने यह ख़तरनाक कार्यवाही तुर्की में करके तुर्क सरकार को भी कठोर संदेश देना चाहा और अपने विरोधियों को भी समझाना चाहा कि उसके हाथ बहुत लंबे हैं।

मगर एसा लगता है कि सऊदी सरकार ने ख़ाशुक़जी के मामले में बहुत भयानक भूल कर दी है और कठोर संदेश देने के चक्कर में अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारी है।

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