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पथरी बिल एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट की मर्कज़ से जवाब तलबी

नई दिल्ली, २१ जनवरी (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने आज मर्कज़ से ख़ाहिश की कि वो पीर के दिन तक जवाब दाख़िल करे कि क्या 5 ओहदेदार बिशमोल एक मेजर जनरल पर फ़ौजी क़ानून के तहत मुक़द्दमा चलाया जा सकता है क्योंकि उन पर इल्ज़ाम है कि 12 साल क़बल कश्मीर क

नई दिल्ली, २१ जनवरी (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने आज मर्कज़ से ख़ाहिश की कि वो पीर के दिन तक जवाब दाख़िल करे कि क्या 5 ओहदेदार बिशमोल एक मेजर जनरल पर फ़ौजी क़ानून के तहत मुक़द्दमा चलाया जा सकता है क्योंकि उन पर इल्ज़ाम है कि 12 साल क़बल कश्मीर के इलाक़ा पथरी बिल में उन्हों ने एक फ़र्ज़ी एनकाउंटर में 7 अफ़राद को गोली मार कर हलाक कर दिया था।

जस्टिस बी एस चौहान और स्वतंत्र कुमार पर मुश्तमिल बंच ने मर्कज़ और सी बी आई को हिदायत दी कि फ़ौज को मुतनाज़ा ख़ुसूसी इख़्तयारात क़ानून के तहत इस्तिस्ना हासिल है या नहीं। इस मसला पर हुकूमत और सी बी आई के दरमयान इख़तेलाफ़ात पाए जाते हैं।

इस मुक़द्दमा की तहक़ीक़ात सी बी आई ने की थी और 2007 में 5 फ़ौजी ओहदेदारों बिशमोल उस वक़्त के ब्रीगेडियर पर जो अब मेजर जनरल बन चुके हैं, फ़र्द-ए-जुर्म आइद किया था।

25 मार्च 2000 को जुनूबी कश्मीर के इलाक़ा पथरी बिल में मुबय्यना तौर पर इन फ़ौजी ओहदेदारों ने 7 अफ़राद को लश्कर-ए-तयबा के दहश्तगर्द क़रार देते हुए जिन्हों ने छती सिंह पूरा में 19 और 20 मार्च की दरमयानी रात को 36 सिखों को गोली मार कर हलाक करदिया था, इल्ज़ाम आइद करते हुए इन अफ़राद को अंधा धुंद फायरिंग में हलाक कर दिया था।

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