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परमाणु डील से अमेरिका के हटते ही ईरान पहुंची चीन की ट्रेन

ईरानी परमाणु डील से हटने की राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के दो दिन बाद ही उत्तरी चीन से एक ट्रेन तेहरान के लिए रवाना हुई. इस पर 1,150 टन सूरजमुखी के बीज लदे थे। ईरान और चीन को जोड़ने वाली रेलवे लाइन पर यह किसी ट्रेन का पहला सफर था।

इसके जरिए चीन के इनर मंगोलिया इलाके से सामान को 20 दिन में ईरान पहुंचाया जा सकेगा। समुद्री मार्ग के मुकाबले इसमें बहुत कम समय लगेगा। यह ट्रेन झंडों से सजी थी और स्पष्ट रूप से यह सांकेतिक मिशन पर थी कि चीन ईरान के लिए कहीं ज्यादा भरोसेमंद साझीदार होगा।

परमाणु डील से हटने और ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने के अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले के बाद दुनिया के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। रूस, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ने कहा है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद वे डील पर कायम रहेंगे। चीन तो ईरान के साथ अपने सहयोग और बढ़ाना चाहता है।

जब दो साल पहले ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों में ढील दी गई तो चीन और ईरान ने अपने आपसी व्यापार को दस साल में दस गुना बढ़ाकर 600 अरब डॉलर तक ले जाने पर सहमति जताई थी। उम्मीद है कि इस योजना में कोई बदलाव नहीं होगा।

चीन मध्य पूर्व में स्थिरता चाहता है। यही वजह है कि उसने क्षेत्र में परमाणु हथियारों की रेस को रोकने के लिए ईरान के साथ समझौते पर दस्तख्त किए. इसके अलावा, चीन की सिल्क रूट परियोजना भी ईरान के बिना पूरी नहीं होगी।

दोनों देशों के बीच व्यापार 2006 से अब तक दोगुना हो चुका है। ईरान में ऐसे बहुमूल्य संसाधन हैं जिनकी चीन को जरूरत है। दुनिया के कुल तेल संसाधन का 10 फीसदी ईरान में है और चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। पिछले साल तो चीन ने तेल आयात करने के मामले में अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया।

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