Thursday , January 18 2018

पर्यावरण और पशु प्रेमी हैं मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जहाँ एक तरफ सख्त दिखाई देते हैं वहीँ दूसरी ओर वह पर्यावरण और पशु प्रेमी भी हैं। पशु-पक्षियों से उनको बेहद लगाव है। उनकी हर सुबह की शुरुआत गौ सेवा के साथ होती है। योगी सुबह दैनिक नित्यकर्म से निपटने के बाद गोरखनाथ मंदिर की गोशाला में गायों को हरा चारा डालने जाते हैं। उनके आश्रम में काफी कुत्ते, गाय और बील्लियां हैं। मठ के लंबे-चौड़े आंगन में रोज दाने बिखेरे जाते हैं और मिट्टी के बर्तनों में पानी भरा रहता है। आश्रम में पलने वाले पशु-पक्षियों में कुत्ता कालू और एक बिल्ली से आदित्यनाथ को बेहद लगाव है।

 

 

मुख्यमंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद उनकी दिनचर्या बदल गई है जबकि गोरखपुर में प्रमुख पुजारी के रूप में बिलकुल अलग दिनचर्या थी। उनके एक सहयोगी ने बताया, वहां आदित्यनाथ सुबह 3 बजे उठकर योग और दैनिक प्रार्थना, फिर गोशाला मे गायों को खिलाने के बाद ही वह नाश्ते करते थे। मंदिर परिसर में दो एकड़ जमीन में गौशाला है। यहाँ एकमात्र मुस्लिम स्वयंसेवक मान मोहम्मद ने बताया क़ि योगी गायों की सेवा के प्रति बहुत समर्पित है। गोरखनाथ मंदिर परिसर में कई जानवर भी हैं, जिसमें एक कुत्ते, एक बिल्ली के अलावा एक हिरण और कुछ बंदरों भी शामिल हैं।

 

 

सुबह में योगी बंदरों को भी कहना खिलाते हैं जिन्होंने मंदिर को अपना घर बना रखा है। गोरखनाथ मंदिर में उनके सहयोगियों ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा के पास बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में एक शेर का शावक आश्रम के पास घूमते हुए गौहरपुर से करीब 150 किलोमीटर दूर मिला था। शावक को कुछ महीनों के लिए आश्रम में रखा गया था और बाद में पुनर्वास के लिए वन विभाग को सौंप दिया गया।

 

 

लेब्राडोर नस्ल के कुत्ते कालू को पूरे आश्रम का रखवाला कहा जाता है। आश्रम के लोग कहते हैं कि जब योगी यहां नहीं होते हैं तो कुत्ता कालू ही सरदार की भूमिका में नजर आता है। योगी अगर आसपास के इलाके में जाते हैं तो कुत्ता कालू उनके साथ होता है। आश्रम में भीड़ कितनी भी हो, एक आवाज पर कालू उनके पास पहुंचता है और बैठ जाता है।

 

मंदिर में एक बिल्ली है जो हमेशा आदित्यनाथ के साथ बैठकर ही खाना खाती है। इस बिल्ली को खीर पसंद है इसलिए उसके लिए रोज खीर बनवाई जाती है। सोशल मीडिया पर आदित्यनाथ की कई ऐसी तस्वीरें हैं, जिसमें वे बंदर और कुत्ते साथ बैठे दिखाए दे रहे हैं।

 

 

गोरखनाथ मंदिर ट्रस्ट ने नेपाल में सीमा पार के नवल पारसी जिले में एक आश्रम स्थापित किया है जिसमें आदित्यनाथ कभी-कभी जाते हैं। पेड़ों के लिए उनका प्यार इतना है क़ि उनके समर्थक उन्हें ‘हरा संत’ कहते है, जिन्होंने मंदिर परिसर में स्थित आवासीय परिसर के आसपास कई पीपल, आम, बरगद और अशोक के कई पौधे लगाए हैं। आदित्यनाथ ने मंदिर और गाय आश्रम के बीच के क्षेत्र में कई सुगंधित और औषधीय पौधों को लगाया है।

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