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पर्सनल ‘लॉ’ पर कमेटी की रिपोर्ट दे केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। मौजूदा वक्त में तीन तलाक़ पर देश में चल रहे बहस में आज सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को ‘पर्सनल लॉ’ पर कमेटी की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसका गठन शादी, तलाक व मुस्लिम समेत छोटे विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए किया गया था।चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और जस्टिस यू यू ललित वाले बेंच ने एडिशनल सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता से अगले छ:हफ्तों के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने के लिए केंद्र के समक्ष आने को कहा। बेंच ने शायरा बानो द्वारा दाखिल की गई याचिका पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा है। बानो की याचिका में मुस्लिम बहुविवाह,तीन बार तलाक व निकाह हलाला के बारे में पूछा गया है।

पूर्व में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने इस मामले को महिलाओं के समान अधिकार का उल्लंघन करार देते हुए स्वत: संज्ञान लेकर चीफ जस्टिस के पास भेजा था और फिर उत्तराखंड की एक पीड़ित मुस्लिम महिला ने अपने तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित महिला शायरा बानो की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, महिला बाल विकास मंत्रालय से इस बाबत जवाब मांगा था। वहीं इस मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हलफनामा दाखिल कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं है क्योंकि ये कोई विधायिका का बनाया एक्ट नहीं बल्कि संविधान का दिया अधिकार है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड की रहने वाली शायरा बानो ने याचिका दाखिल की है। शायरा को उनके पति ने तीन बार तलाक कह के तलाक दे दिया था।मालूम हो की पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अब समय आ गया है उचित कदम उठाने का। तीन तलाक और एक पत्नी के रहते दूसरी शादी देश की महिलाओं के मूलभूत अधिकार का उल्लंघन है। समय के साथ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में बदलाव ज़रूरी है। सरकार, विधायिका इस बारे में विचार करें।

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