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पहले अमेरिका और यूरोप परमाणु हथियार नष्ट करे, फिर ईरान से परमाणु कार्यक्रम पर करे बातचीत- हसन रुहानी

तेहरान। ईरान ने अमरीका और यूरोप के सामने बातचीत के लिए एक बड़ी शर्त रखी है। ईरानी सेना के के एक वरिष्ठ अधिकारी शनिवार को कहा कि ईरान तब तक अपने मिसाइल कार्यक्रम पर बातचीत नहीं करेगा, जब तक यूरोप और अमेरिका अपने परमाणु हथियारों और मिसाइलों को नष्ट नहीं कर देते।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की सेनाओं के उपसेना प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मसूद जाजायेरी ने शनिवार को कहा, ‘अमरीका जिस हताशा के साथ ईरान की परमाणु क्षमताओं पर प्रतिबंध लगाने की बात कह रहा है, वह सपना कभी पूरा नहीं होने वाला।’

जाजायेरी ने कहा, ‘ईरान की परमाणु शक्ति को लेकर अमेरिका की चिंता क्षेत्र में उनकी निराशा और हार से उपजी है।’ इसके अलावा ईरान के रक्षा शक्ति के विकास से अमरीका कमजोर स्थिति में आ गया है। उन्होंने अमरीका से क्षेत्र छोड़ देने का आग्रह किया है।

उन्होंने जोर देकर कहा, ‘ईरान के मिसाइल कार्यक्रम के लिए वार्ता की पूर्व शर्त यह है कि अमरीका और यूरोप अपने परमाणु हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइलों को नष्ट करें।’

अमरीका के दबाव में यूरोप ने मिसाइल कार्यक्रमों पर दोबारा चर्चा के लिए ईरान पर दबाव बढ़ाया है। ईरान ने दोहराया है कि उसके सैन्य बल रक्षा क्षमताओं को बढ़ाना जारी रखेंगे।

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री ने भी कहा है कि ईरान अपने घरेलू मामलों और रक्षात्मक नीतियों विशेष रूप से मिसाइल कार्यक्रम में किसी तरह के हस्तक्षेप को मंजूरी नहीं देगा।

गौरतलब है कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अमरीका ने काफी कड़ा रुख अख्तियार किया हुआ है और इसकी वजह से दोनों देशों के नेताओं के बीच हालिया दिनों में काफी तीखी बयानबाजी देखने को मिली है।

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