Friday , September 21 2018

पाँच रियासतों में असेंबली इंतिख़ाबात के निज़ामुल-अमल का ऐलान

इलेक्शन कमीशन ने आज पाँच रियासतों दिल्ली राजिस्थान मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और मिजोरम में असैंबली इंतिख़ाबात के निज़ाम अलमामल का ऐलान करेगा।

इलेक्शन कमीशन ने आज पाँच रियासतों दिल्ली राजिस्थान मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और मिजोरम में असैंबली इंतिख़ाबात के निज़ाम अलमामल का ऐलान करेगा।

चीफ़ इलेक्शन कमिशनर वे एस संपत और दो इलेक्शन कमिश्नर एच एस ब्रह्मा और नसीम ज़ैदी की क़ियादत में एक इजलास मुनाक़िद किया गया था, जहां निज़ामुल-अमल को क़तईयत दी गई। इजलास में इलेक्शन कमीशन के दीगर आला सतही ओहदेदार भी मौजूद थे। ज़राए के मुताबिक़ तमाम पाँच रियासतों में असैंबली इंतिख़ाबात का आग़ाज़ नवंबर के दूसरे हफ्ते से होकर दिसम्बर के पहले हफ़्ते तक इख़तताम पज़ीर होगा, जबकि नताइज का ऐलान भी दिसम्बर के पहले ही हफ़्ते में होगा ।

चार रियासतों की असैंबलियों की मीयाद दिसम्बर में ही खत्म हो रही है और इस से क़ब्ल ही नई असेंबलियों की तशकील ज़रूरी है। दिल्ली असेंबली 70 अरकान पर मुश्तमिल है। राजिस्थान असेंबली 200अरकान पर और मिज़ोरम असेंबली 40 अरकान पर मुश्तमिल है । इन तीनों रियासतों में असेंबली इंतिख़ाबात एक ही मरहले में मुनाक़िद होंगे, जबकि छत्तीसगढ़ जैसी नक्सल मुतास्सिरा रियासतों में सक्यूरिटी फोर्सेस की दस्तियाबी के मुताबिक़ इंतिख़ाबात दो या तीन मराहिल में मुनाक़िद किए जाऐंगे।

छत्तीसगढ़ असेंबली 90 अरकान पर मुश्तमिल है और मध्य प्रदेश असेंबली 230 अरकान पर। मध्य प्रदेश की मौजूद असेंबली की मीयाद 12 दिसम्बर को ख़त्म हो रही है। मिज़ोरम की 15 दिसम्बर को और दिल्ली असेंबली की 17 दिसम्बर को जबकि राजिस्थान असेंबली की मीयाद 31 दिसम्बर को और छत्तीसगढ़ असेंबली की मीयाद आइन्दा साल 4 जनवरी को ख़त्म हो रही है। याद रहे कि 2008 में गुज़िश्ता असेंबली इंतिख़ाबात के दौरान दिल्ली राजिस्थान मध्य प्रदेश और मीज़ोरम में इंतिख़ाबात सिर्फ़ एक ही मरहला में मुनाक़िद किए गए थे जबकि छत्तीसगढ़ इंतिख़ाबात दो मराहिल में मुनाक़िद किए गए थे। दूसरी तरफ़ ज़राए ने बताया कि पांचों रियासतों में पुरअमन और ग़ैर जांबदाराना इंतिख़ाबी अमल की तकमील के लिए 60,000 सेक्यूरिटी फोर्सेस को तयनात किया जाएगा जिनकी ज़्यादा तादाद इन असेंबली हलक़ों में तयनात होगी जिन्हें हस्सास क़रार दिया गया है।

इस तरह अब आइन्दा महीने से ही मज़कूरा पांचों रियासतों में इंतिख़ाबी सरगर्मियों में इज़ाफ़े के साथ सियासी हलचल भी पैदा होगी जिस से ना सिर्फ़ इंतिख़ाबात में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवार बल्कि अवाम भी महज़ूज़ होते हैं।

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