पाकिस्तानी अखबारों का दावा, पुलवामा हमले का फायदा उठाएंगे नरेंद्र मोदी !

पाकिस्तानी अखबारों का दावा, पुलवामा हमले का फायदा उठाएंगे नरेंद्र मोदी !

पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान फिर सवालों में घिर गया है. लेकिन वहां का उर्दू मीडिया अलग ही नजरिए से इस हमले का विश्लेषण कर रहा है. अपने देश की करतूतों पर पर्दा डालते हुए पाकिस्तानी अखबार इसे भारत के आगामी आम चुनाव से जोड़ रहे हैं. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी की पूरी कोशिश होगी कि पाकिस्तान विरोधी भावनाओं को भड़काकर इस हमले का पूरा सियासी फायदा उठाया जाए.

एक तरफ पाकिस्तानी अखबारों में पुलवामा हमले से पूरी तरह पल्ला झाड़ने वाले पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के बयान को प्रमुखता दी गई है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा वापस लेने पर लिखा गया है कि इससे पाकिस्तान पर कोई असर नहीं होगा, बल्कि उल्टे भारत का ही नुकसान होगा.

चुनावी एंगल रोजनामा एक्सप्रेस ने अपने संपादकीय में लिखा है कि पाकिस्तान को भारत से सावधान रहना चाहिए. अखबार के मुताबिक अजीब बात यह है कि पुलवामा हमले की छानबीन अभी पूरी भी नहीं हो पाई है, लेकिन भारतीय सरकार और मीडिया ने अपनी तोपों का रुख पाकिस्तान की तरफ कर दिया है. अखबार की टिप्पणी है कि नरेंद्र मोदी और उनके साथी इस मौके पर कुछ भी कर सकते हैं क्योंकि उन्हें चुनाव जीतना है.

अखबार की राय में, हालिया विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हार से पता चलता है कि मोदी की लोकप्रियता गिर रही है और उन्हें पुलवामा जैसी घटना की जरूरत है ताकि वह भारतीय जनता के बीच पाकिस्तान विरोधी भावनाओं को हवा दे सकें.

रोजनामा पाकिस्तान लिखता है कि भारत में आतंकवाद की कोई भी छोटी या बड़ी घटना होती है तो उसका इल्जाम सीधे पाकिस्तान पर आता है. अखबार कहता है कि ऐसा दशकों से होता आया है, फिर चाहे भारत में सरकार किसी भी पार्टी की रही हो. अखबार की राय में, पुलवामा हमले के बाद भी ऐसे ही इल्जाम लगाए जा रहे हैं जबकि हमले को अंजाम देने वाले आत्मघाती हमलावर का पता चल चुका है कि वह कौन था, उसके पिता जिंदा है और बता रहे हैं कि वह चरमपंथी क्यों बना.

अखबार के मुताबिक, ऐसे में भारत की सरकार का फर्ज तो यह है कि वह पता लगाए कि कश्मीर के लोग उसके खिलाफ क्यों उठ खड़े हो रहे हैं. इसके साथ ही अखबार ने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के इस बयान को अपने संपादकीय में तवज्जो दी है जिसमें पुलवामा हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने के आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है.

MFN खत्म करने से भारत को नुकसान!

रोजनामा दुनिया ने भी पुलवामा हमले को भारत के आगामी आम चुनाव के चश्मे से देखा है. अखबार कहता है कि मोदी की लोकप्रियता की कलई तो दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनावों के दौरान ही खुल गई थी, जिनमें भारतीय जनता पार्टी अपने सबसे मजबूत किले गंवा बैठी.

अखबार के मुताबिक बात यहीं नहीं रुकी, बल्कि विपक्षी पार्टियों के गठबंधन के कारण चुनावी मैदान में मोदी के पैर उखड़ रहे हैं. अखबार कहता है कि मोदी के पास अब लोगों का दिल जीतने के लिए कुछ और बातें तो हैं नहीं, इसलिए वह पाकिस्तान विरोधी एजेंडे पर चुनाव लड़ना चाहते हैं.

अखबार कहता है कि पुलवामा की घटना के जरिए मोदी सरकार एक तीर से कई शिकार करना चाहेगी. इसके अलावा अखबार कहता है कि पाकिस्तान ने हाल के समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर जो कामयाबी हासिल की है, भारत उन पर पानी फेरना चाहता है.

इन कामयाबियों में अखबार ने तालिबान और अमेरिका के बीच बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका, चीन और रूस जैसी ताकतों के साथ नजदीकियां, चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर, मध्य पूर्व और मुस्लिम देशों के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में गर्मजोशी और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की तरफ से मदद के भरोसे को गिनाया है.

रोजनामा खबरें ने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान से व्यापार के लिए सबसे पसंदीदा देश (मोस्ट फेवर्ड नेशन) का दर्जा वापस लिए जाने पर लिखा है कि इससे भारत को ही नुकसान होगा.

अखबार ने लिखा है कि दो साल पहले पाकिस्तान ने भारत से एक अरब 21 करोड़ डॉलर का आयात किया था जबकि पाकिस्तान ने पड़ोसी देश को सिर्फ 40 करोड़ डॉलर का माल बेचा था, इसलिए ऐसा MFN दर्जा हमारे किस काम का था. अखबार के मुताबिक इस फैसले पाकिस्तान को नुकसान नहीं बल्कि फायदा ही होगा. इसके साथ ही अखबार ने दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायुक्त के सामने हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए लिखा है कि वहां हालात तनावपूर्ण हो गए थे.

चप्पे चप्पे की सुरक्षा रोजनामा औसाफ लिखता है कि मोदी की तरफ से पाकिस्तान को दी जा रही धमकियों को नजर अंदाज ना किया जाए. अखबार लिखता है कि हमले की जिम्मेदारी लेने वाला संगठन जैश ए मोहम्मद एक प्रतिबंधित संगठन है और इससे पाकिस्तान का कोई लेना देना नहीं है.

अखबार कहता है कि राजनयिक तनाव बढ़ाने से कोई फायदा नहीं होगा. अखबार कहता है कि अब जब भारत पाकिस्तान को सीधे पर हमले की धमकी दे रहा है तो इसे बिल्कुल नजर अंदाज नहीं किया जाए, क्योंकि ‘उन्मादी’ भारतीय नेतृत्व ऐसी कोई भी कोशिश कर सकता है जिससे वह जनता की हमदर्दी हासिल कर सके. अखबार की राय है, ‘दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखी जाए और देश की भौगोलिक सीमाओं की चप्पे चप्पे की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए.’

साभार- फर्स्ट पोस्ट

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