Thursday , August 16 2018

पाकिस्तानी वकील का फौज को चैलेंज

पाकिस्तान में एक रिटायर्ड वकील ने मुल्क की ख़ुफिया एजेंसियों पर इल्ज़ाम आइद किया कि उन पर हमला करवाया गया ताकि वो फौज के खिलाफ जारी कानूनी लड़ाई बंद कर दें। कर्नल इनाम-उल-रहीम ने मीडिया को बताया कि उनकी जान को खतरा है और हफ्ते को सशस

पाकिस्तान में एक रिटायर्ड वकील ने मुल्क की ख़ुफिया एजेंसियों पर इल्ज़ाम आइद किया कि उन पर हमला करवाया गया ताकि वो फौज के खिलाफ जारी कानूनी लड़ाई बंद कर दें। कर्नल इनाम-उल-रहीम ने मीडिया को बताया कि उनकी जान को खतरा है और हफ्ते को सशस्त्र लोगों ने उनके 19 साल के बेटे को मारा और उनकी कार को आग लगा दी।

गुजस्ता हफ़्ते उन्होंने फौजी सरबराह जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कयानी की मुद्दत तीन साल बढ़ाने को कानूनी चुनौती दी थी।

इसी मामले पर दूसरे दर्खास्त पर कुछ नहीं हुआ है। लेकिन इस बार इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने दर्खास्त कुबूल कर ली है। मामले की समाअत 22 नवंबर को होनी है। बेटे के साथ मारपीट के वाकिया के तीन दिन पहले कर्नल रहीम पर भी हमला हुआ था। इस वजह से उनके चेहरे, सर और जिस्म पर चोट आई है। कर्नल रहीम के साथ मारपीट का वाकिया रावलपिंडी में फौजी हेडक्वाटर के पास हुई। पाकिस्तानी फौज ने इन इल्ज़ामों को बेबुनियाद बताया है।

गुजस्ता पाँच सालों में लोगों के लापता होने के मामलों में कर्नल रहीम ने सेना को कानूनी चैलेंज दिया है। कर्नल इनाम-उल-रहीम उन लोगों की नुमाइंदगी कर रहे हैं जो सालों से गुमशुदा हैं और जिनके घर वाले वाले कहते हैं कि उन्हें खुफिया एजेंसियों ने पकड़ा हुआ है।

कर्नल रहीम के बमुजब जब वे पुलिस के पास गए तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से मना कर दिया। बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “ये हमला मेरे लिए के लिए था कि मैं फौजी कियादत को ग़ैर क़ानूनी कदमों के खिलाफ़ कोर्ट केस न करूँ। मुझे लगता है कि ये हमले फौजी सरबराह के कहने पर खुफिया एजेंसी ने किए।”

कर्नल तारिक़ कमाल ने कहा है, “ये हमारे लिए फिक्र का मौजू है। हम नहीं कह सकते कि हमले के पीछे कौन है। लेकिन जिसने भी ऐसा किया है उन्हें पकड़ना चाहिए।”

57 साल के कर्नल रहीम ने फौज में 27 साल तक काम किया और हज़ारों फौजी अफ्सरों को फौजी कानून की तालीम दी। बाद में वे पाकिस्तानी फौज की का़नूनी यूनिट में जज भी थे। उनका कहना है, “मैने जल्दी रिटायरमेंट ले ली क्योंकि मेरे सामने आए मामलों को लेकर मुझ पर ऊपर से दबाव रहता था और मैं ऐसा नहीं करना चाहता था।”

कुछ लोग कर्नल रहीम को मज़हबी ख्यालो वाले अच्छे वकील बताते हैं। कर्नल का कहना है कि वे आइनी ( संविधान) के खिलाफवर्जी पर सवाल उठा रहे हैं जो उनका हक़ है। कर्नल रहीम के मुताबिक उन्हें जान की धमकी दी जा चुकी है। वे बताते हैं, “पिछले हफ़्ते उन्होंने मुझे फौज के इंटेलीजेंस डिपार्टमेंट में बुलाया था और मुझे कहा कि मैं गुमशुदा लोगों से जुड़े मामले छोड़ दूँ। वरना मुझे कुछ हो सकता है।”

जनरल कयानी के खिलाफ मामला ऐसे वक्त में आया है जब अदलिया मज़बूती से अपनी बात रखते हुए नज़र आ रही है और फौज की कियादत दिफाई अंदाज़ अपनाए हुई है ।

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